नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में अबतक के ऐतिहासिक मतदान के बीच विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपनी मुहिम की नई सिरे से शुरुआत की है। इसके लिए 13 विपक्षी दलों के 73 राज्यसभा सांसदों ने शुक्रवार को सीईसी को उनके पद से हटाने के लिए नोटिस दिया है। विपक्ष कुछ हफ्ते पहले ही सीईसी ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में कोशिश कर चुका है, लेकिन राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने नोटिस के जांच के चरण में ही उसे स्वीकार्य नहीं किए जाने योग्य मानते हुए खारिज कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्यसभा में विपक्ष के पास ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का बहुमत नहीं है।read more:https://pahaltoday.com/bjp-government-is-being-formed-in-bengal-will-win-110-seats-in-the-first-phase-shah/ ऊपर से शुक्रवार को ही राज्यसभा में 10 सांसदों वाले विपक्षी दल आम आदमी पार्टी के 7 सांसद राघव चड्ढा की अगुवाई में खुद को सत्ताधारी बीजेपी में विलय कर चुके हैं। विपक्ष ने अभी तक लोकसभा में भी इसी तरह का ताजा प्रस्ताव लाने के लिए अभी खुद को तैयार नहीं किया है। कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद और पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की ताजा मुहिम के तहत उनके खिलाफ नौ विशेष आरोप होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि सीईसी के खिलाफ अब नौ खास तरह के आरोप हैं, जिन्हें बहुत ही विस्तार से दस्तावेजों में समेटा गया है और जिन्हें न तो सीधे नकारा जा सकता है और न ही उन पर पर्दा डाला जा सकता है। उनका पद पर बने रहना संविधान पर हमला है। यह बहुत ही शर्म की बात है कि वह व्यक्ति अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं, जिससे वे पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के इशारों पर काम कर सकें। विपक्ष के कुछ सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर उनकी ओर से लगाए गए नौ आरोपों में से कुछ का जिक्र भी किया है, जिनमें पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण, बड़े पैमाने पर मताधिकार छीनना, आचार संहिता के पालन में पक्षपात, पीएम मोदी के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन के खिलाफ विपक्ष की शिकायत न सुनना, चुनावी धोखाधड़ी की जांच को जान-बूझकर बाधित करना, एसआईआर को इस तरह से करना शामिल है।