ओमैक्स मिनरल्स पर फर्जीवाड़े का आरोप, खनन पट्टों की जांच की मांग

सोनभद्र। ओबरा तहसील अंतर्गत बिल्ली-मारकुंडी व खेबंधा गांव स्थित रेणु नदी में मे. ओमैक्स मिनरल्स प्रा.लि. के नाम से आवंटित पत्थर और बालू खनन पट्टा को लेकर एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। मे. ओमैक्स मिनरल्स प्रा.लि. एवं उसके कथित पूर्व निदेशक पर भारी अनियमितता और फर्जीवाड़े के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।read more:https://pahaltoday.com/solar-streetlights-gather-dust-villagers-upset/
जनसुनवाई (मुख्यमंत्री पोर्टल) सहित उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र के जरिए की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ओबरा तहसील अंतर्गत ग्राम बिल्ली मारकुण्डी स्थित आराजी संख्या 4478, रकबा 2.20 हेक्टेयर क्षेत्र में डोलोस्टोन खनन के लिए मे. ओमैक्स मिनरल्स प्रा.लि. को 10 वर्षीय पट्टा 2 अगस्त 2022 से 1 अगस्त 2032 तक स्वीकृत हुआ था। इस पट्टे से जुड़े माइनिंग प्लान, पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण विभाग की सहमति, डीजीएमएस अनुमति एवं रजिस्ट्री डीड सहित सभी दस्तावेजों पर कंपनी की ओर से निदेशक के रूप में सचिन अग्रवाल द्वारा हस्ताक्षर किए गए। आरोप है कि ऑनलाइन उपलब्ध कंपनी रिकॉर्ड के अनुसार, सचिन अग्रवाल ने 14 नवंबर 2022 को ही निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि वर्तमान में कंपनी के निदेशक आकाश सिंघल एवं अनुभव सिंघल हैं। इसके बावजूद बीते लगभग चार वर्षों से खनन विभाग की कथित मिलीभगत से सचिन अग्रवाल द्वारा निदेशक के रूप में पत्राचार और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जाते रहे। इसी प्रकार ग्राम खेबंधा, तहसील ओबरा स्थित आराजी संख्या 246 (खण्ड-स) रकबा 7.00 हेक्टेयर क्षेत्र में बालू खनन के लिए 9 जनवरी 2023 से 08 जनवरी 2028 तक स्वीकृत पट्टे को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इस पट्टे की रजिस्ट्री 23 जनवरी 2023 को हुई, जिसमें सचिन अग्रवाल ने कंपनी के निदेशक के रूप में हस्ताक्षर किए, जबकि वे उससे पहले ही निदेशक पद छोड़ चुके थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि निदेशक पद पर न रहते हुए सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना गंभीर फर्जीवाड़ा है, जिससे संबंधित रजिस्ट्री और उसके बाद किया गया खनन अवैध माना जाना चाहिए। मामले में मांग की गई है कि दोनों खनन पट्टों में तत्काल खनन एवं परिवहन पर रोक लगाई जाए, पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो तथा कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए।

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