नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में आंतरिक कलह और बयानबाजी का दौर अब नेताओं के निजी जीवन और शादियों तक पहुंच गया है। हाल ही में पार्टी के पूर्व नेता और हरियाणा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने एक सनसनीखेज वीडियो जारी कर राघव चड्ढा और अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा की शादी को लेकर गंभीर दावे किए हैं। जयहिंद का कहना है कि पार्टी के भीतर जारी मौजूदा झगड़े और टूट-फूट की असली जड़ राघव चड्ढा की यह शादी ही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर कुछ लोग इस शादी के खिलाफ थे और राघव पर सगाई तोड़ने से लेकर शादी के बाद तलाक लेने तक का दबाव बनाया गया था। यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक बयान में कहा कि राघव चड्ढा की शादी परिणीति चोपड़ा से इसलिए हो पाई क्योंकि आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा सांसद और पंजाब का सुपर सीएम जैसा रसूख दिया, अन्यथा उन्हें कोई नहीं पूछता। इस पर पलटवार करते हुए नवीन जयहिंद ने कहा कि सच तो यह है कि राघव को ये तमाम पद इसलिए दिए गए थे ताकि उनकी शादी कराई जा सके, लेकिन विवाद तब पैदा हुआ जब शादी की जगह बदल गई। जयहिंद के अनुसार, पार्टी नेतृत्व चाहता था कि राघव चड्ढा की शादी कहीं और हो, लेकिन उन्होंने परिणीति को चुना, जो झगड़े की शुरुआत बनी। जयहिंद ने वीडियो में सीधे तौर पर राघव चड्ढा और सौरभ भारद्वाज को चुनौती देते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब उन्हें जनता के सामने पूरी सच्चाई खोल देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सौरभ भारद्वाज जो कभी राघव चड्ढा के बेहद करीबी माने जाते थे, आज उनके पदों और शादी पर सवाल उठा रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/oil-has-run-out-over-400-petrol-pumps-in-andhra-pradesh-shut-down/ हालांकि, जयहिंद ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पार्टी राघव की शादी किससे कराना चाहती थी या परिणीति चोपड़ा से इस गठबंधन पर किसे और क्यों ऐतराज था। गौरतलब है कि राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा की शादी सितंबर 2023 में उदयपुर में शाही अंदाज में हुई थी। उस समय इसे एक बड़ी सेलिब्रिटी शादी के रूप में देखा गया था, जिसमें राजनीति और मनोरंजन जगत की दिग्गज हस्तियां शामिल हुई थीं। अब करीब ढाई साल बाद इस शादी को लेकर हो रहे राजनीतिक दावों ने दिल्ली और पंजाब की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। फिलहाल इस मामले पर आम आदमी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई पेश नहीं की गई है, लेकिन पूर्व नेताओं के इन हमलों ने पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।