नई दिल्ली। दिल्ली स्थित सिविल सेवा परीक्षा कोचिंग सेंटर की निदेशक शुभ्रा रंजन का 3 मई को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बंदूक की नोक पर अपहरण कर लिया गया था और 1.89 करोड़ रुपए से ज्यादा की फिरौती मांगी गई थी। इस तरह के अपराध का यह अकेला मामला नहीं है। पिछले एक दशक में 10 लाख से ज्यादा अपहरण के मामले सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक यही नहीं, वर्ष 1953 से 2024 के बीच अपहरण और अगवा करने के 20 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, जो भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज कुल मामलों का करीब 1.7 फीसदी है। कुल मामलों में से 54 फीसदी 2013 से 2024 के बीच सामने आए हैं। इस अवधि में केवल 0.7 फीसदी मामले ही फिरौती से जुड़े हैं। वर्ष 1953-62 के दशक के बाद से अपहरण के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। आईपीसी मामलों में इनकी हिस्सेदारी 1973-82 के दशक से बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक अपहरण के मामलों में फिरौती बड़ी वजह नहीं रही है।read more:https://worldtrustednews.in/councilors-mobilized-to-investigate-financial-irregularities-in-afzalgarh-municipal-council/ सबसे अधिक मामले लोगों को जबरन उठाने यानी अपहरण से जुड़े हैं, जो कुल मामलों के आधे से भी ज्यादा हैं। इसके बाद शादी के लिए महिलाओं के अपहरण के मामले आते हैं, जबकि फिरौती के लिए अपहरण या अगवा करने के मामलों की हिस्सेदारी इनमें बहुत कम है। अपहरण के मामलों में शीर्ष छह राज्यों में से बिहार 2024 में सबसे नीचे रहा। पिछले कुछ सालों में यह राज्य महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद तीसरे नंबर पर रहा है।