नई दिल्ली, । महाराणा प्रताप हॉर्टिकलचर यूनिवर्सिटी करनाल के माननीय कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को एग्रीकल्चर अवार्ड-2026 देकर सम्मानित किया। ये अवार्ड कुलपति प्रो. सुरेश को उनकी बागवानी के क्षेत्र में उपलब्धियों ओर विश्व स्तरीय रिसर्च से किसानों के जीवन में आए बदलावों के कारण मिला। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों अवार्ड मिलना, प्रदेश व यूनिवर्सिटी परिवार के लिए गर्व की बात है।17 वें एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉन्क्लेव का आयोजन नई दिल्ली स्थित ओबेरॉय होटल में किया गया, कॉन्क्लेव में एमएचयू कुलपति ने बतौर विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। कार्यक्रम का थीम फीडिंग द फ्यूचर (भविष्य के लिए भोजन) पर केंद्रित था।कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सहित प्रदेश के मंत्रियों ने विशेषतौर से शिरकत की। देश की महान वैज्ञानिक हस्तियों के साथ एमएचयू के माननीय कुलपति प्रो सुरेश मल्होत्रा जी का एक मंच पर शिरकत देशवासियों के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा से सम्बधित समस्याओं के निवारण करने में विस्तृत व्याख्यान देना, एमएचयू परिवार के लिए बड़े गर्व की बात है।माननीय कुलपति ने दुनियाभर से आए महान वैज्ञानिकों के समक्ष न केवल भविष्य में भोजन सम्बधित समस्याओं के समाधान को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए, साथ ही विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों के पूछे प्रश्नों के तथ्यप्ररक उत्तर दिए।read more:https://khabarentertainment.in/monsoon-makes-a-spectacular-entry-in-kaiserganj-heavy-rains-bring-smiles-to-farmers-faces/माननीय कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने अवार्ड मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि देश प्रदेश के वैज्ञानिक नए नए अनुसंधान कर रहे है, जिनकी बदौलत देश का खाद्यान्न भंडार भरे हुए है। लेकिन जिस प्रकार जनसंख्या बढ़ रही है, उसी अनुरूप वैज्ञानिक चिंतित है कि लोगों को पोषण युक्त भोजन मिले। जिसमें सभी प्रकार के पोषण से भरपूर हो। इसके अलावा ऐसी किसान खेती किसानी के तौर तरीकों को बदले, जिससे प्राकृतिक संसाधन कम से कम प्रभावित हो, पर्यावरणीय हितकारी हो। भारत सरकार व प्रदेश सरकार का सपना है कि देश प्रदेश में बागवानी खेती का रकबा बढ़े, फल, फूल, सब्जियां, मसाले, मशरूम आदि की खेती की ओर किसान ज्यादा से ज्यादा करें। इसके अलावा जिस प्रकार की खेती किसान भाई कर रहे है, उसमें पेस्टीसाइड, यूरिया, खाद की मात्रा न के बराबर हो। इसके लिए किसान भाईयों को कृषि-बागवानी वैज्ञानिकों द्वारा इजाद की जा रही नई तकनीकों को अपनाना होगा, जो किसानों के साथ साथ देशहित में साबित होगी। यह अवॉर्ड बागवानी विश्वविद्यालय करनाल को बागवानी के क्षेत्र में नए अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए मिला।