SC/ST मुकदमे में पत्रकार को जमानत, जमीन विवाद से जुड़ी साजिश के आरोपों ने उठाए सवाल

वाराणसी। जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में विशेष अदालत ने पत्रकार पवन कुमार मिश्रा को जमानत दे दी। मामले में उन पर फेसबुक के माध्यम से जातिसूचक टिप्पणी करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, बचाव पक्ष की ओर से अदालत में पेश किए गए तथ्यों के आधार पर आरोपों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।बचाव पक्ष का कहना है कि जिस फेसबुक लाइव का उल्लेख शिकायत में किया गया, उसके संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों से घटना की पुष्टि नहीं होती। साथ ही, मामले में जातिसूचक शब्दों के कथित इस्तेमाल को लेकर भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने का तर्क अदालत के समक्ष रखा गया। इन दलीलों पर विचार करते हुए अदालत ने पवन कुमार मिश्रा को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत प्रदान की।मामले की पृष्ठभूमि में जमीन का विवाद भी सामने आया है। पत्रकार के परिवार का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और जमीन पर कब्जे के प्रयास का विरोध करने के कारण उन्हें मुकदमों में फंसाने की साजिश की जा रही है। परिवार का दावा है कि इसी विवाद को दबाव में बदलने के लिए SC/ST कानून का सहारा लिया गया।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteपरिवार की ओर से शिकायतकर्ता पक्ष के कुछ लोगों के आपराधिक इतिहास और पुराने मामलों का भी हवाला दिया गया है। हालांकि, इन आरोपों और आपराधिक इतिहास से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित पक्ष का बयान सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।पत्रकार के परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों का समर्थन शिकायतकर्ता पक्ष को प्राप्त है और राजनीतिक प्रभाव के कारण प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि मुकदमा गलत तथ्यों के आधार पर दर्ज कराया गया है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।इस मामले में अदालत से मिली जमानत को बचाव पक्ष अपनी दलीलों की मजबूती के रूप में देख रहा है। हालांकि, जमानत आदेश को मामले में अंतिम निर्दोषता का प्रमाण नहीं माना जा सकता और मुकदमे का अंतिम फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।अब पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जमीन विवाद और SC/ST मुकदमे के बीच क्या कोई संबंध है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है। यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो शिकायत के पीछे की भूमिका की भी जांच की जरूरत होगी। वहीं, यदि अभियोजन के आरोप साक्ष्यों से पुष्ट होते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होना तय है।फिलहाल अदालत के जमानत आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है और संबंधित पक्षों की नजर अब पुलिस जांच तथा आगे होने वाली न्यायिक कार्रवाई पर टिकी है।

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