जनपद लखीमपुर खीरी शासन की योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई। कुंभी ब्लॉक के कस्बा अज़ान की नई बस्ती में 20 लाख 80 हजार रुपये की लागत से बनी राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की नई इमारत मरीजों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि मुसीबत बन गई है। कार्यदायी संस्था ने पूरी बिल्डिंग मुख्य सड़क से करीब दो फीट नीचे बना दी है। नतीजा, हल्की बारिश में ही पूरे परिसर में पानी भर जाता है और मरीजों को कीचड़ से होकर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है बताया जाता है कि यह अस्पताल वर्ष 1992 से कस्बे की मेला कमेटी की बिल्डिंग में संचालित हो रहा था। बिल्डिंग जर्जर होने पर वर्ष 2018 में इसे इमलिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट किया गया था। वर्षों के प्रयास के बाद शासन ने नई बिल्डिंग मंजूर की थी, लेकिन निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई।ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था ने एक अगस्त को कागजों में निर्माण कार्य पूर्ण दिखा दिया और 8 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया। इसके बाद 16 अगस्त से बिना उद्घाटन और बिना किसी सूचना के गुपचुप तरीके से वहीं से संचालन शुरू करा दिया गया।मौके पर न कोई खड़ंजा है, न अस्पताल तक जाने के लिए पक्की सड़क, न इंटरलॉकिंग।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/परिसर के अंदर और बाहर मिट्टी भराव तक नहीं हुआ है। परिसर में घास-फूस और झाड़ियां उगी हुई हैं, कई कमरों का फर्श अधूरा पड़ा है। जलभराव के कारण बैठने तक की जगह नहीं है।ग्रामीण रामनिवास, हरिओम, सतीश कुमार, रवि प्रकाश, सलीम और नसीम ने बताया कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को फिसलते हुए अस्पताल आना पड़ता है। आए दिन मरीज कीचड़ में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 20 लाख से अधिक की यह बिल्डिंग सरकारी धन की बर्बादी है। अगर ईमानदारी से जांच हो तो ठेकेदार से लेकर जिम्मेदार अधिकारी तक इसकी जद में आएंगे। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और सीएमओ से उच्चस्तरीय जांच, परिसर में मिट्टी भराव और पक्के संपर्क मार्ग के निर्माण की मांग की है।इस संबंध में जिला होम्योपैथिक अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मिट्टी भराव उनके एस्टीमेट में शामिल नहीं था। सड़क से नीचे ढलान के लिए अलग से बजट नहीं आता है। हैंडओवर ग्राम प्रधान की मौजूदगी में हुआ है। प्रधान से कहा गया है कि कहीं खुदाई होगी तो मिट्टी अस्पताल परिसर में डलवा दी जाएगी। यह काम जेई के क्षेत्र में नहीं आता। बिल्डिंग से जुड़ी अन्य जानकारी कार्यदायी संस्था ही दे सकती है।