बहराइच ( मिहींपुरवा )। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष के प्रभावी समाधान और सीमापार समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में एक महत्वपूर्ण भारत-नेपाल ट्रांसबाउंड्री कार्यशाला का आयोजन किया गया। नेचर एनवायरनमेंट एंड वाइल्डलाइफ सोसायटी (NEWS) द्वारा नेपाल की संस्था ‘उज्यालो नेपाल’ के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में दोनों देशों के वन अधिकारियों, संरक्षण विशेषज्ञों और सुरक्षा बलों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में कतरनियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) अपुर्व दीक्षित, नेपाल के बर्दिया राष्ट्रीय उद्यान के मुख्य वन संरक्षक (CCF) डॉ. अशोक राम, डॉ. दबीर हसन (WWF), वन्यजीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के प्रतिनिधि और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के निरीक्षक शामिल थे। कतरनियाघाट के डीएफओ ने कहा कि सीमापार समन्वय, त्वरित सूचना आदान-प्रदान और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से इस संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ. दबीर हसन ने तराई आर्क लैंडस्केप (TAL) में एशियाई हाथियों के संरक्षण और उनके पारंपरिक प्रवासन मार्गों की सुरक्षा पर बल दिया, जबकि बर्दिया राष्ट्रीय उद्यान के CCF डॉ. अशोक राम ने खाता कॉरिडोर में हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए साझा निगरानी प्रणाली की आवश्यकता जताई।read more:https://khabarentertainment.in/youth-injured-by-high-voltage-electric-shock-dies-during-treatment/कार्यशाला के दौरान NEWS के सितांग्शु दास ने कतरनियाघाट में स्थापित अर्ली वार्निंग सायरन (EWS) प्रणाली और प्रशिक्षित ‘गजमित्रों’ की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, SSB निरीक्षक ने संयुक्त गश्त और WTI प्रतिनिधि ने वैज्ञानिक अनुसंधान, समुदाय-आधारित संरक्षण व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। कार्यशाला में नेपाल के “हात्ती मेरो साथी” अभियान और भारत के “गजमित्रों” ने अपने-अपने जमीनी अनुभव साझा किए। सभी प्रतिभागियों ने पूर्व बैठकों के निर्णयों की समीक्षा, सीमापार त्वरित सूचना तंत्र और फसल सुरक्षा उपायों पर गहन चर्चा करते हुए भविष्य में भारत-नेपाल सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर देहात संस्था के रामनरायन, NEWS की कम्युनिटी एडुकेटर श्रुति लोहानी, कम्युनिटी मोबिलाइजर जैनुल आबदीन, अरविंद और राजा हसन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।