यूपीएससी के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी डॉ जितेंद्र सिंह जी, पीके मिश्रा जी, टीवी सोमनाथन जी, अजय कुमार जी, यूपीएससी की सभी माननीय सदस्यगण, अलग अलग राज्यों से आए सभी  PSCs के चेयरमैन, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों। मैं आज की इस बात करने से पहले, कल जो एक घटना घटी, और भारत के कैप्टन स्मित ने जिस प्रकार से धैर्य, सूझबूझ और साहस का परिचय करवाया, और जैसे आज इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस हिन्दुस्तानी ने 9/11 होने से बचा लिया। हर देशवासी के लिए स्मित का ये पराक्रम हमें गौरव से भर देता है। आज मेरी उनके पिता भूपेंद्र भाई, उनकी माता गीता बहन और पत्नी बहन सोनल से भी बातचीत हुई। उनकी सारबार (इलाज) चल रही है, आज पूरी दुनिया उन पर गर्व कर रही है। मैं देशवासियों से प्रार्थना करता हूं कि हम सब स्मित की दीर्घायु के लिए, स्मित के उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें, और भारत के गौरव को बढ़ाने वाले भाई स्मित का अभिनंदन करें। आज का ये दिन यूपीएससी के 100 वर्षों के उत्सव के साथ ही एक विरासत का भी उत्सव है। ये उत्सव उस आकांक्षा का है, जिसे हर वर्ष लाखों लाख युवा उसे जीते हैं। ये उत्सव उस विश्वास का है जो हर भारतवासी का इस संस्था पर है। 100 वर्ष की इस यात्रा में पीढ़ियां बदली, सरकारें बदली, टेक्नोलॉजी बदली, सिलेबस बदले, लेकिन यूपीएससी पर भरोसा आज भी उतना ही अटूट है, और ये आप सभी की बहुत बड़ी पूंजी है। 100 वर्षों की इस यात्रा पर अभी यहीं स्मारक डॉक टिकट और सिक्का जारी किया गया है। 100 महत्वपूर्ण Case laws का संकलन भी जारी हुआ है। मैं 100 वर्ष की इस यात्रा से जुड़े सभी महानुभावों का वंदन करता हूं। आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। अभी मैं एक छोटी सी गैलरी बनाई है, उसका निरीक्षण कर रहा था, और आप सबसे भी कहूंगा की 10-15 मिनट लगेंगे, जरूर देखें, और मैंने उसमें 75 साल के कार्यक्रम का भी एक चित्र देखा, जिसमें Lt. General सुरेन्द्र नाथ दिखते हैं। आज 90 साल की आयु में हमारे बीच मौजूद हैं। एैसे कितने ही लोग हैं, जिन्होंने इस यात्रा को विश्वास में बदला है, समयानुकूल परिवर्तन किए हैं, और संस्था को भी नई ऊचाईयों पर ले गए हैं। वे सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं। जब मैं गैलरी देख रहा था, तो 1920 में सुभाष चंद्र बोस ने भी, इसी प्रक्रिया से जब गुजरे थे, उसकी सारी जानकारी वहां है। और मेरा इस बात पर ध्यान गया कि उस समय अंग्रेजों की हुकूमत थी, लेकिन संस्कृत का पेपर हुआ करता था, और सुभाष बाबू ने संस्कृत में पेपर लिखा है।आज इस ऐतिहासिक अवसर पर, मैं सरदार वल्ल्भ भाई पटेल जी को भी नमन करूंगा। आजादी के बाद उनके सामने केवल एक देश को आजाद रखने की चुनौती नहीं थी। उनके सामने एक राष्ट्र को चलाने की चुनौती भी थी। राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए जिस स्टील फ्रेम की ज़रूरत थी, वो स्टील फ्रेम सरदार वल्ल्भ भाई पटेल ने दिया। उन्होंने इस संस्था को आजाद भारत का एक प्रमुख स्तंभ बनाया, इसे सशक्त किया।1926 में जब इस संस्थान की नींव रखी गई थी, तब उस समय की प्राथमिकताएं अलग थीं। उस समय, व्यवस्था का फोकस और उसका समर्पण, दोनों ही ब्रिटिश राज के प्रति था। देश आज़ाद हुआ, तो आजाद भारत के सपने और भारत की व्यवस्था, ये फोकस में रहे, केंद्र में रहे। बीते दशकों में UPSC ने अपने दायित्वों को बेहतरीन तरीके से निभाया है। और इस बारे में यहां मंच से काफी बातें हुई हैं। और इसलिए मैं न उसका पुनरावर्तन करना चाहता हू, न ही उसके विस्तार में जाना चाहता हूं। इतिहास से आगे बढ़कर, अब हमारे सामने, भारत का भविष्य इंतजार कर रहा है। 21वीं सदी का एक क्वार्टर, 25 साल बीत चुके हैं। आने वाले 20-25 साल भारत के लिए, भारत के हर व्यक्ति, भारत की हर संस्था के लिए बहुत अहम हैं। इसलिए आज मैं अपनी चर्चा का फोकस इसी दिशा में रखूंगा।विकसित भारत के लिए अब जिस तरह की गवर्नेंस देश को चाहिए, उसका बहुत बड़ा माध्यम UPSC और राज्यों के चयन आयोग भी हैं। आज आप जिन युवाओं की भर्ती कर रहे हैं, वो विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे, और वही विकसित भारत के सबसे बड़े बेनिफिशियरी भी होने वाले हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, हमें दो कसौटियों को हमेशा याद रखना है। पहले कसौटी है – Nation First. और दूसरी कसौटी है – Citizen First, यही दो कसौटियां हैं, जिन पर हर सलेक्शन को कसा जाना है। और जब इस भाव से कैंडिडेट्स को परखा जाएगा, इस भाव से भरे कैंडिडेट्स का सेलेक्शन होगा, तो राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति उतनी ही सहज हो जाएगी, आसान हो जाएगी।2047 का भारत आज के भारत से बहुत अलग होगा। भारत आज के मुकाबले और अधिक Urban होगा। गांव और शहरों का अंतर कम होगा। और हमारे नागरिकों, खासकर युवाओं की Aspirations और Expectations कहीं ज्यादा बड़ी होंगी। आज ही इसका बदलाव दिखाई दे रहा है। इसलिए आज सवाल सिर्फ Service Delivery का नहीं है। सवाल यह भी है, कि क्या Public Services, आज की Instant Delivery वाली दुनिया की गति, उसको पकड़ पा रहे हैं क्या? उस हिसाब से चल पार रहे हैं क्या? आज नागरिक किसी Service के लिए, हफ्तों या महीनों का इंतजार नहीं करना चाहता। जब AI हजारों Documents को कुछ ही क्षणों में Process कर सकता है, जब सरकार के पास Real-Time Data उपलब्ध है, तो नागरिक तेजी से समाधान चाहता है। यही बदलती हुई सोच हमारी Civil Services से भी नए बदलाव की मांग करती है। इसलिए हमें अपने Selection Parameters और Recruitment Process को भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना होगा। हमें ऐसे युवाओं को Public Services में लाना होगा, जो Public Office से नहीं, Public Service से आकर्षित हों। इसलिए जरूरी है कि Recruitment की परीक्षा, सिर्फ यह न परखे कि Candidate कितना जानता है। बल्कि वो यह भी देखे कि, वह युवा Civil Services में आना क्यों चाहता है। क्योंकि जब Motivation सही होगा, तो बदलती जन-आकांक्षाओं के साथ चलना भी आसान होगा, ढलना भी आसान होगा।आप में से काफी लोग इस बात से परिचित हैं, कि मैं जब Trainee Officers से मिलता हूं, तो उनसे कहता हूं कि वे लिखकर रखें प्रारंभ में ही और खुद लिखकर के उसको रखें, वे Civil Service में क्यों आए हैं? क्योंकि समय के साथ Responsibilities बढ़ती हैं। नई चुनौतियां आती हैं। ऐसे समय में वही छोटा-सा Note, उन्हें उनके मूल उद्देश्य की याद दिलाता है। यह उनके लिए एक Self-Appraisal Tool भी बन जाता है। UPSC और राज्यों के आयोग भी कुछ ऐसी व्यवस्था को विकसित करने के बारे में विचार कर सकते हैं।हमने अतीत का वो दौर देखा है, जब माना जाता था कि सरकार ही माई-बाप है। लेकिन आज ये दौर है जिसमें हमारा मंत्र है, ‘नागरिक देवो भव।’ यानी देश का नागरिक हमारे लिए किसी देव से कम नहीं है।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/हमारे लिए नागरिक की सेवा सर्वोपरि है। आज 21वीं सदी का भारत, एक नई कार्य-संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। इसका मूल सिद्धांत है –  Pro-People, Pro-Active, Good Governance! Pro-People यानी सरकार की सुविधा को देखते हुए नहीं बल्कि नागरिक के हितों को सर्वोपरि रखते हुए काम करना। Pro-Active यानी जब समस्या आए तब एक्शन के बजाय, समस्या को पहले ही एंटीसिपेट करके उसके समाधान तैयार हों। Good Governance यानी सरकार का अभाव भी न हो, दबाव भी ना हो और अनावश्यक प्रभाव भी न हो। राष्ट्रीय स्तर पर और राज्य के स्तर पर, दोनों ही जगह, हमें अपने सेलेक्शन प्रोसेस को इसी स्पिरिट के हिसाब से डिजायन करना चाहिए। हमें Pro-people, Pro-active, गुड गवर्नेंस के पैरामीटर्स के आधार पर देश को वो प्रोफेशनल्स देने हैं, जिनमें गरीब की तकलीफ समझने की संवेदना हो, जो युवा जोश के साथ खुद आगे बढ़कर काम करें, जो इनोवेटिव तरीके से कठिन समस्याओं का रास्ता निकालें, जो देश की आवश्यकताओँ को समझें, जो कानून का पालन कराएं, लेकिन ये भी परख सकें, कि उस कानून से लोगों का जीवन आसान हो रहा है या फिर वो रुकावट बन रहा है?आज जिस तेजी से युग बदल रहा है, टेक्नोलॉजी बदल रही है,  वो हम सब देख रहे हैं। इसके बाद जो आने वाला समय है, उसमें नई तरह की चुनौतियां समाज के सामने आने जा रही हैं। AI को लेकर इस समय विश्व में जो चर्चा छिड़ी हुई है, उससे हम सब परिचित हैं। ऐसे में हमारे सिविल सर्वेंट्स भी, अलग तरह की परिस्थितियों में काम करेंगे। Information war की स्थिति होगी, Deepfakes होंगे, Algorithmic बायस के चैलेंज होंगे, Climate justice जैसे कॉम्पलेक्स सवाल होंगे, ऐसे में हमें चयन प्रक्रिया में, कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम सॉल्विंग और दूरदृष्टि को टेस्ट करने का भी, उस प्रयासों को भी प्राथमिकता देनी होगी।हम सभी जानते हैं, देश आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर तेज़ी से चल रहा है। ऐसे समय में, हमारी परीक्षा कराने वाली एजेंसीज को, उन रिफॉर्म्स पर तेजी से काम करना होगा, जो आज के समय की मांग हैं। जैसे, परीक्षाओं को कराने में लगने वाला समय एक बहुत अहम विषय है। परीक्षा को हमें केवल एक इवेंट की तरह नहीं देखना है। ये इवेंट से कहीं अधिक युवाओं के भविष्य से, उनके जीवन से जुड़ा हुआ है। परीक्षाओँ में कुछ महीनों की देरी युवाओं के लिए बड़ा संकट बन सकती है। कोचिंग की फीस, रेंट, ट्रांसपोर्ट का खर्च, ये बहुत बड़ा बोझ उस परिवार पर होता है। इसलिए, हमारा examination system, Time Certainty के सिद्धांत को अपनाए, ये बहुत आवश्यक है। इसलिए, UPSC को, देश के सभी चयन आयोगों को, ये सुनिश्चित करना होगा, कि Bar को Low किए बिना, हमारी एग्जामिनेशन साइकिल छोटी कैसे हो? वैसे मैं अभी गैलरी में देख रहा था, करीब 100 दिन कम किए हैं, ये तो बधाई के पात्र हैं ही हैं, और मैं आप सबको बधाई देता हूं। आप सभी चीफ सेक्रेटरीज कॉन्फ्रेंस और DGP कॉन्फ्रेंस के बारे में जानते हैं। पिछले 10 साल में ये एक ऐसा institutional mechanism डेवलप हुआ है। जिसमें से देश के सभी सीएस तीन दिन साथ बैठकर के विचार विमर्श करते हैं। उसी प्रकार से तीन दिन के लिए डीजीपी कॉन्फ्रेंस में देश के सभी डीजीपी इकट्ठे होकर के बातचीत करते हैं। और  इन कॉन्फ्रेंस में एक प्रयास होता है, कि एक राज्य दूसरे राज्य की बेस्ट प्रेक्टिसेज को जाने, समझे, सीखे, और उचित लगे तो उन्हें अपने राज्य में लागू करे। मुझे बताया गया है कि UPSC हर वर्ष, स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन्स के साथ मिलकर, National Conference आयोजित करता है। अब उसको और विस्तार देकर के, और अधिक productive बनाने के लिए, और अधिक नए विचारों से भरने के लिए भी, उसके रूप संग व्यवस्था को कैसे नया आयाम दिया जाए, उस पर जरूर आप सोचते होंगे।  ऐसे प्रयासों से अलग-अलग संस्थानों की बेस्ट प्रेक्टिसेज साझा होती है। लेकिन साथ ही, इस कॉन्फ्रेंस में international best practices को भी स्टडी करना चाहिए।  टेक्नॉलॉजी का उपयोग करके अपनी process और procedures की efficiency, ये कैसे बढ़े, इस पर भी focussed चर्चा होनी चाहिए। Cross Learning के इस प्रयास से UPSC को भी फायदा होगा,  और हर राज्य के चयन आयोग को भी जरूर लाभ होगा। हमें process और procedures के मानकों को, स्टैंडर्डाइज करने पर भी विचार करने की आवश्यकता है। इससे युवाओं को बहुत बड़ी  मदद मिलेगी।एक और विषय, UPSC और राज्यों के चयन आयोगों की कैपेसिटी बिल्डिंग का भी है। ये काम भी निरंतर होते रहना चाहिए। मिशन कर्मयोगी के तहत जो i-GOT प्लेटफॉर्म बनाया गया है, उसका उपयोग हमारी इन अंदरूनी व्यवस्थाओं के लिए भी, हमारे साथ काम करने वाली टीम की capability के लिए भी, इन सारे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किया जा सकता है।आप सभी को हमेशा ये याद रखना है, कि आपका काम युवाशक्ति के भविष्य से जुड़ा है। यानी युवाशक्ति से राष्ट्रशक्ति के निर्माण का जो मिशन है, आप उसका एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। और बीते वर्षों में आपने इसमें बड़ी भूमिका निभाई भी है। जब UPSC का गठन हुआ था, तब बड़े शहरों, समर्थ परिवारों और बड़े संस्थानों से पढ़े युवाओं को अवसरों का लाभ अधिक मिलता था। लेकिन आज गांवों और कस्बों के युवा भी पब्लिक सर्विस में पहुंच रहे हैं। हमारी बेटियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। 1952 में, सिविल सर्विसेज में Women Candidates की संख्या सिर्फ 3 पर्सेंट थी, 3 प्रतिशत। आज यह 30 पर्सेंट, 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। और UPSC के पूरे इतिहास में चार वीमेन चेयरपर्सन्स रही हैं, पूरे UPSC  के इतिहास में। ताली बजने का समय अब आएगा। पूरे UPSC की हिस्ट्री में 4, उसमें से 3 2014 के बाद बनी हैं। ये बदलाव केवल आंकड़े नहीं हैं, ये बताते हैं कि देश में अवसरों का दायरा कितना बढ़ा है।  1976 में, जब UPSC को 50 साल हुए थे, उस समय की तुलना में, परीक्षा देने वालों की संख्या में 45 गुणा से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है, 45 time। यानी आज हमारे सामने, Talent का एक बहुत बड़ा Pool है। ये देश के लिए बहुत गर्व की बात है। अब हमारी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। क्योंकि जब इतना बड़ा टैलेंट पूल पूरी दुनिया जिस पर इर्ष्या करती है, जब सामने इतना बड़ा टैलेंट पूल है, तो आप सिर्फ एक Candidate को Select नहीं कर रहे हैं। आप ऐसे व्यक्ति का चयन कर रहे हैं, जो आगे चलकर Government का Representative बनेगा। Ground Level पर लोग उसी को Government मानेंगे। इसलिए आप सभी पर सही व्यक्ति के चयन का बहुत बड़ा दायित्व है।UPSC ने अपने पहले 100 साल में, अपनी विश्वसनीयता को निरंतर मजबूत किया है। अब इस संस्था को अपनी दूसरी सदी में, नई संभावनाओं, नई चुनौतियों के हिसाब से विश्वसनीयता को और समृद्ध करना है। जो Values आज तक हमारी ताकत रही हैं, उन्हें बनाए रखते हुए, भविष्य के अनुरूप अपग्रेड भी करना है। UPSC की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता, गोपनीयता और निष्पक्ष प्रक्रिया, यही उसकी पहचान हैं। ये मूल्य हमेशा बने रहना चाहिए। इसी आग्रह के साथ आप सभी को फिर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद!

 

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