गाजीपुर । दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराने के उद्देश्य से बुधवार को कासिमाबाद ब्लॉक में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला एवं मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने की।कार्यशाला में जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और सुझावों की जानकारी ली। महिलाओं द्वारा उठाई गई समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने महिलाओं से खेती-किसानी के संबंध में जानकारी लेते हुए पूछा कि उन्हें कृषि कार्य के लिए आवश्यक बीज उपलब्ध हो रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं खेती करना चाहती हैं, उन्हें उद्यान विभाग के माध्यम से उनकी आवश्यकता के अनुसार बीज उपलब्ध कराया जाए।read more:https://pahaltoday.com/weavers-to-be-empowered-by-modern-technology-handloom-industry-in-nandganj-gains-new-momentum/उन्होंने उद्यान विभाग के अधिकारी को निर्देशित किया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जिस प्रकार के बीज की जरूरत है, उनकी उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए, ताकि महिलाएं कृषि गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।डीएम ने बैंकों में स्वयं सहायता समूहों से संबंधित लंबित प्रकरणों को शीघ्र निस्तारित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बैंकिंग कार्यों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही सीएम युवा योजना एवं पीएम सूर्यघर योजना को प्राथमिकता के आधार पर पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।कार्यशाला के दौरान जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने विभिन्न विभागों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का भी अवलोकन किया। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र लोगों तक पहुंचना ही प्रशासन की प्राथमिकता है।उन्होंने यह भी कहा कि जनपद के सभी सरकारी विभागों में प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की स्टेशनरी की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्टेशनरी सहित अन्य उपयोगी सामग्री के उत्पादन एवं आपूर्ति से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में भी कार्य किया जा सकता है।