प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में सम्राट कैबिनेट का विस्तार

पटना।बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में किया गया। मुख्यमंत्री बनने के 22 दिन बाद हुए इस मेगा कैबिनेट विस्तार समारोह में गांधी मैदान में 30 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। समारोह को एनडीए की शक्ति और एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। सीएम सम्राट के नई कैबिनेट में बीजेपी से 15, जदयू से 13, एलजेपी (रामविलास) से 2 तथा हम और आरएलएम से एक-एक मंत्री शामिल किए गए हैं। खास बात यह रही कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने पहली बार मंत्री पद की शपथ ली। उनके अलावा दीपक प्रकाश को भी मंत्री बनाया गया, जबकि दोनों फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय और सामाजिक समीकरणों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। नई कैबिनेट में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) से 10, ओबीसी से 6, दलित वर्ग से 7, सवर्ण वर्ग से 9 तथा मुस्लिम समुदाय से एक मंत्री को जगह दी गई है।read more:https://pahaltoday.com/workers-should-work-keeping-in-mind-the-concept-of-self-reliance-dinesh-rawat/ वहीं पांच महिला मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिनमें तीन मंत्री जदयू कोटे से हैं। मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तथा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद रहे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नीतीश कुमार को अपने पास बुलाकर उनसे हाथ मिलाया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच आत्मीयता भी देखने को मिली। एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक मोदी का रोड शो शपथ ग्रहण के पहले चरण में निशांत कुमार, श्रवण कुमार, विजय सिन्हा, लेसी सिंह और दिलीप जायसवाल ने शपथ ली। समारोह के दौरान गांधी मैदान पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पटना एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक सड़कों पर उमड़े। जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए थे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बीजेपी कार्यालय के बाहर हरे राम-हरे कृष्ण भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जबकि राजधानी पटना में “भगवामय, अंग, बंग और कलिंग” जैसे पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।

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