नई दिल्ली। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) की रिपोर्ट जारी कर दी गई है। इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतक सामने आए हैं। सर्वेक्षण के अनुसार देश में घरेलू हिंसा और बाल विवाह के मामलों में कमी दर्ज की गई है, जबकि महिलाओं में मोटापे की समस्या और सिजेरियन प्रसव के मामलों में वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की दर 2019-21 के 29.2 प्रतिशत से घटकर 22.3 प्रतिशत रह गई है। वहीं बाल विवाह के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है और यह आंकड़ा 23.3 प्रतिशत से घटकर 20.1 प्रतिशत पर पहुंच गया है। कामकाजी महिलाओं की हिस्सेदारी 25.4 प्रतिशत से बढ़कर 30.8 प्रतिशत हो गई है। देश में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। अब 98.3 प्रतिशत घरों तक बिजली और 96.5 प्रतिशत घरों तक स्वच्छ पेयजल की पहुंच हो चुकी है। महिलाओं में इंटरनेट उपयोग का दायरा भी तेजी से बढ़ा है और यह लगभग दोगुना होकर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। स्तनपान कराने की दर घटी हालांकि रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक संकेत भी सामने आए हैं। महिलाओं में मोटापे की दर पिछले सर्वेक्षण की तुलना में 7 प्रतिशत बढ़ी है।read more:https://pahaltoday.com/ntpc-singrauli-sets-out-to-realise-the-resolve-of-clean-india/निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत बढ़कर 54.1 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं जन्म के बाद शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने की दर 63.7 प्रतिशत से घटकर 55.8 प्रतिशत रह गई है। नारी सशक्तिकरण में सकारात्मक बदलाव महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव दर्ज हुआ है। अब 18.8 प्रतिशत परिवारों में महिलाओं के नाम मकान या जमीन का स्वामित्व है, जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत था। बच्चों को पर्याप्त आहार चिंता का विषय बच्चों के पोषण संबंधी संकेतकों में सुधार हुआ है। कुपोषण के कारण नाटेपन (स्टंटिंग) का शिकार बच्चों का प्रतिशत 35.5 से घटकर 29.3 हो गया है। हालांकि 6 महीने से 2 वर्ष तक की आयु के केवल 15.3 प्रतिशत बच्चों को ही संतुलित और पर्याप्त आहार मिल पा रहा है, जो अभी भी चिंता का विषय है। बिहार में सर्वाधिक घरेलू हिंसा दर्ज राज्यों के आंकड़ों में केरल बाल विवाह के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला राज्य रहा, जबकि पश्चिम बंगाल और बिहार में इसके मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए। वैवाहिक हिंसा के मामले में हिमाचल प्रदेश सबसे सुरक्षित राज्य रहा, जबकि बिहार में महिलाओं को सबसे अधिक घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट सामाजिक और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के संकेत देती है, लेकिन पोषण, महिला स्वास्थ्य और परिवार नियोजन जैसे क्षेत्रों में अभी भी व्यापक प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है।