गाजीपुर। थाना दुल्लहपुर में दर्ज FIR संख्या 0221/2026 को लेकर भाजपा जखनियां मंडल अध्यक्ष अशोक चौहान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कटौली गांव निवासी गोविंद चौहान ने पुलिस अधीक्षक गाजीपुर को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि अशोक चौहान ने गलत तथ्य प्रस्तुत कर उनके परिवार के सदस्यों को आपराधिक मुकदमे में फंसाया है। मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।गोविंद चौहान के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को थाना दुल्लहपुर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 191(3), 115(2) एवं 110 के तहत FIR संख्या 0221/2026 दर्ज की गई। इसमें गोविंद चौहान, मनोज चौहान, किरन चौहान और सरोज चौहान सहित परिवार के सदस्यों को नामजद किया गया।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/
घटना के समय बाहर थे गोविंद और मनोज, फिर भी मुकदमे में नाम
शिकायतकर्ता का आरोप है कि घटना के समय गोविंद चौहान और मनोज चौहान राज्य से बाहर थे। दोनों के राज्य से बाहर होने के प्रमाण भी पुलिस अधीक्षक को दिए गए हैं। इसके बावजूद उन्हें घटना में शामिल बताते हुए मुकदमे में नामजद कराया गया। परिवार का आरोप है कि यह सब गलत तथ्यों के आधार पर किया गया।
मुकदमे में नाम आने के बाद तनाव, 26 अगस्त को मां की मौत
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि मुकदमे में परिवार के सदस्यों के नाम आने के बाद गोविंद चौहान की मां श्रीमती चंद्रावती देवी मानसिक तनाव और सदमे में थीं। इसी बीच 26 अगस्त 2026 को उन्हें हृदयाघात हुआ और उनका निधन हो गया। परिवार ने उनके उपचार और निधन से संबंधित अभिलेख भी पुलिस को सौंपे हैं।
अशोक चौहान पर कार्रवाई की मांग
गोविंद चौहान ने अपने प्रार्थना पत्र में भाजपा जखनियां मंडल अध्यक्ष अशोक चौहान पुत्र रामचंद्र चौहान पर जानबूझकर गलत तथ्य प्रस्तुत कर निर्दोष लोगों को मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है। उन्होंने एसपी से मांग की है कि राज्य से बाहर होने के प्रमाण सहित सभी दस्तावेजों की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि घटना में वास्तव में किसकी भूमिका थी।शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि पुलिस जांच में अशोक चौहान द्वारा गलत तथ्य प्रस्तुत कर निर्दोष लोगों को मुकदमे में फंसाने का आरोप सही पाया जाता है तो उनके खिलाफ प्रचलित कानून के तहत कार्रवाई की जाए।फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस स्तर से पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।