बाराबंकी। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही बाराबंकी सदर विधानसभा सीट की राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। पिछले तीन चुनावों में लगातार सपा के खाते में गई इस सीट को हासिल करने के लिए विपक्षी दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्ष ने उम्मीदवार चयन में फिर चूक की तो 2027 में भी सदर सीट पर सपा का जीतना लगभग तय माना जाएगा। राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले का सदर विधानसभा क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है। अब तक 18 चुनाव हो चुके हैं लेकिन इस सीट पर भाजपा की जीत का खाता नहीं खुल सका है। 2017 में जब जिले की पांच सीटों पर भगवा फहराया तो सदर ही एकमात्र सीट थी जिस पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी। अब इस बार भी भाजपा के लिए ये सीट बड़ी चुनौती है। इसी मुद्दे को लेकर शहर के बुद्धिजीवियों, व्यापारियों, शिक्षकों, किसानों और युवाओं से बातचीत की। चर्चा के दौरान कई नाम सामने आए, लेकिन सबसे अधिक समर्थन दो चेहरों को मिला। इनमें भाजपा नेता डॉ विवेक सिंह वर्मा और कांग्रेस नेता नईम सिद्दीकी प्रमुख रूप से शामिल रहे। लोगों का मानना है कि ये दोनों ऐसे चेहरे हैं जिनकी हिंदू और मुस्लिम दोनों वर्गों में अच्छी पकड़ है और जो पारंपरिक वोट बैंक की सीमाओं को तोड़कर व्यापक समर्थन जुटाने की क्षमता रखते हैं। लोगों ने बातचीत के दौरान कहा कि यदि कांग्रेस नेता नईम सिद्दीकी या बसपा नेता मो. मुबश्शिर चुनाव में उतरते है तो इस बार मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है और भाजपा की जीत की संभावना भी मजबूत होगी। बहरहाल, भाजपा नेता डॉ विवेक सिंह वर्मा का नाम इन दिनों जिले की राजनीति में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। कम उम्र में उन्होंने चिकित्सा जगत में ऐसी सफलता हासिल की है, जिसे पाने का सपना कई लोग पूरी जिंदगी देखते रहते हैं। जिले में उनकी चिकित्सीय सेवाओं से हजारों लोग लाभांवित हुए। राजनीतिक विरासत भी उनके पक्ष में एक मजबूत आधार मानी जाती है। उनके मौसा स्व. रामचन्द्र बख्श सिंह बाराबंकी सदर सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे। उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए डॉ विवेक सिंह वर्मा ने समाजसेवा के जरिए राजनीति शुरू की। जो आज हर युवा को अपनी ओर खींच रहा है। जनता के सरोकारों से जुड़ी राजनीति इस दौर में ऐसा जनप्रतिनिधि खोजती है जिसकी आँखों में दिन-रात समाज के अंतिम छोर पर खड़े आम आदमी तक विकास पहुंचाने का सपना तैरता रहता हो। यही कारण है कि डॉ विवेक वर्मा का नाम केवल चिकित्सीय सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भी उनकी सक्रियता चर्चा में रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ विवेक वर्मा की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत है। विभिन्न वर्गों में उनकी पहुंच और संपर्क उन्हें एक संभावित प्रभावशाली उम्मीदवार के रूप में स्थापित करती हैं।
read more:https://khabarentertainment.in/drug-smuggler-arrested-with-469-grams-of-illegal-charas-major-action-by-mirzapur-police-under-operation-savera/
सपा का मजबूत गढ़ बनी सदर सीट
बाराबंकी सदर सीट पर पिछले तीन विधानसभा चुनावों में सपा ने जीत दर्ज की है। सपा विधायक धर्मराज सिंह यादव लगातार तीन बार इस सीट से विजयी हुए, लेकिन प्रदेश में सपा की सरकार न बनने से वह मंत्री बनने से चूक गए। धर्मराज सिंह यादव विभिन्न मंचों से सड़क निर्माण, पुल-पुलियों के निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा ने जातीय समीकरण के आधार पर सदर सीट पर मजबूत पकड़ बनाई है। ऐसे में भाजपा को केवल समीकरणों के भरोसे नहीं बल्कि एक प्रभावशाली, स्वच्छ छवि और सर्वमान्य चेहरे के साथ मैदान में उतरना होगा।
2017 से 2022 तक का चुनावी गणित
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धर्मराज सिंह यादव को 99,453 वोट मिले, वहीं बसपा प्रत्याशी के तौर पर सुरेन्द्र सिंह वर्मा रनर रहे। उन्हें 69,748 वोट मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी हरगोबिन्द सिंह 67,112 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं साल 2022 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर सपा ने धर्मराज सिंह यादव पर भरोसा जताया और उन्होंने अप्रत्याशित जीत दर्ज की। इस बार उन्हें सबसे ज्यादा 1,25,500 वोट मिले। दूसरी तरफ भाजपा ने अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरे के रूप में तत्कालीन जिलाध्यक्ष अरविंद मौर्य की पत्नी डॉ रामकुमारी मौर्य को टिकट देकर सभी को चौंका दिया था। उस समय भाजपा संगठन के भीतर डॉ रामकुमारी मौर्य की पहचान मजबूत थी, लेकिन आम जनता के बीच उनका नाम उतना चर्चित नहीं था। बावजूद इसके, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर और भाजपा की मजबूत रणनीति के चलते डॉ रामकुमारी मौर्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 90,450 वोट हासिल किए और दूसरे स्थान पर रही। वहीं पहली बार चुनाव मैदान में उतरे डॉ विवेक सिंह वर्मा ने बसपा उम्मीदवार के तौर पर 42,506 वोट हासिल किए।
2027 की लड़ाई में ‘चेहरा’ होगा सबसे बड़ा मुद्दा
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 2027 का चुनाव केवल दलों के बीच नहीं बल्कि चेहरों की लड़ाई भी होगा। यदि भाजपा ऐसा उम्मीदवार उतारती है जिसकी सभी वर्गों में स्वीकार्यता हो, तो मुकाबला कड़ा हो सकता है। वहीं यदि टिकट बंटवारे में मतभेद या वोटों का बिखराव हुआ तो सपा की चौथी बार जीत की राह आसान हो सकती है। फिलहाल बाराबंकी के राजनीतिक गलियारों में एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है, क्या डॉ विवेक सिंह वर्मा वह नया चेहरा साबित होंगे जो सदर सीट पर सपा के विजय रथ को रोक सकेगा, और 2027 में कमल खिलाएगा। आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब राजनीतिक समीकरण और दलों की रणनीति तय करेगी।