जनपद लखीमपुर खीरी कोतवाली निघासन क्षेत्र के बंगला राज से एक महिला ने घर में घुसकर चोरी करने और विरोध करने पर मारपीट किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर पीड़िता रामकुमारी पत्नी स्वर्गीय राम नरेश ने कोतवाली प्रभारी निरीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उचित कानूनी कार्यवाही की मांग की है। प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों के अनुसार घटना ने इलाके में सनसनी पैदा कर दी है। रात करीब 10 बजे घर में घुसने का आरोप पीड़िता के अनुसार उसके परिवार के लोग इलाज के सिलसिले में बाहर गए हुए थे। और वह घर पर अकेली थी। आरोप है। कि 01 सितंबर 2026 की रात करीब 10 बजे अशोक पुत्र छोटे लाल कथित तौर पर चोरी करने की नीयत से उसके घर में घुसा और घर में रखे पांच हजार रुपये चोरी कर लिए। प्रार्थना पत्र में कहां गया है। कि चोरी करते समय महिला ने आरोपी को देख लिया। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप। शिकायत के मुताबिक चोरी का विरोध करने पर मामला और गरमा गया। पीड़िता का आरोप है।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteकि 02 सितंबर 2026 को आरोपी ने विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए उसके साथ मारपीट की तथा चाकू से प्रहार कर दिया,जिससे उसके हाथ में गंभीर चोट आई। महिला ने यह भी आरोप लगाया है। कि आरोपी ने घटना के बाद धमकी दी कि यदि उसके खिलाफ कही शिकायत या कार्यवाही की गई तो उसे जान से मार देगा। शिकायत के बाद पुलिस कार्यवाही पर टिकी निगाहें पीड़िता ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और उचित कानूनी कार्यवाही किए जाने की मांग की है। अब देखना यह है। कि पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की किस तरह की जांच व कार्यवाही करती है। और मेडिकल रिपोर्ट,घटनास्थल,गवाहों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे क्या कार्यवाही सामने आती है। इन धाराओं में बन सकती है। कार्यवाही प्रकरण में आरोप सही पाए जाने और जांच में आवश्यक तत्व सामने आने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराएं लग सकती है। घर में चोरी के आरोप में धारा 305 प्रासंगिक हो सकती है।,जबकि अपराध करने के उद्देश्य से घर में प्रवेश के तथ्य पाए जाने पर धारा 329/331 पर विचार हो सकता है। मारपीट से चोट के मामले में धारा 115,और धमकी के आरोप में धारा 351 लागू होने की स्थिति बन सकती है। गाली-गलौज से शांति भंग कराने के उद्देश्य का तथ्य साबित होने पर धारा 352 भी प्रासंगिक हो सकती है। हालांकि अंतिम धाराएं पुलिस की जांच,मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होंगी। फिलहाल मामला शिकायत और लगाए गए आरोपों पर आधारित है।; आरोपी का पक्ष सामने आने पर उसे भी उसके मुताबिक खबर में शामिल किया जाना उचित होगा।