इतिहास से हौसला, तकनीक से चुनौती और लोककला से पहचान का संदेश

सीकर (डॉ. महेश गुप्ता) । शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन शनिवार को इतिहास, तकनीक और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं पर मंथन हुआ। गुरु तेग बहादुर के बलिदान की वर्तमान प्रासंगिकता से लेकर विकसित भारत में युवा पीढ़ी की भूमिका, डिजिटल माध्यमों के प्रभाव और शेखावाटी की कला परंपराओं के संरक्षण तक कई विषय चर्चा के केंद्र में रहे। लोककला प्रतियोगिताओं और नाट्य प्रस्तुतियों ने आयोजन के सांस्कृतिक पक्ष को भी समृद्ध किया। सालासर रोड स्थित गोविंदम रिसॉर्ट में श्री केशव संस्कृति प्रन्यास एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगम के प्रथम सत्र ‘Gen Z, टेक्नोलॉजी और एल्गोरिद्म : विकसित भारत में भूमिका’ में वर्ष 2047 के संदर्भ में युवा शक्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के प्रभाव जैसे विषय शामिल रहे। सत्र के लिए कर्ण कटारिया वक्ता और अनिल जी संचालक के रूप में निर्धारित थे।

शेखावाटी की हवेलियाँ सांस्कृतिक इतिहास की धरोहर

‘लोकमंथन एवं लोकवस्तु’ सत्र में सुरेश कुमार नायक, सोनिया शर्मा और अतुल सैनी ने शेखावाटी की भित्तिचित्र कला, पारंपरिक स्थापत्य और हवेलियों के संरक्षण पर विचार रखे। वक्ताओं ने चित्रकला की प्राचीन तकनीकों, प्राकृतिक रंगों और स्थानीय कला परंपराओं को सहेजने की आवश्यकता बताई। संचालन डॉ. सुनिधि मिश्रा ने किया।

युद्ध केवल हथियारों से नहीं, हौसलों से भी लड़े जाते हैं : प्रो. राठौड़

‘हल्दीघाटी से वैश्विक चुनौती तक : आज का भारत’ विषय पर महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर के कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने कहा कि इतिहास विपरीत परिस्थितियों में साहस और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। हल्दीघाटी के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, हौसलों से भी लड़े जाते हैं। उन्होंने नेतृत्व क्षमता और दूरगामी रणनीति के महत्त्व को रेखांकित किया। संचालन डॉ. हेमंत कुमार ने किया।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं : राहुल सिंह

‘रील, रियलिटी और सिनेमा’ विषय पर अभिनेता राहुल सिंह ने कहा कि सिनेमा युवाओं की सोच को प्रभावित करता है, लेकिन वास्तविक जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। इसके लिए पढ़ाई और मेहनत जरूरी है। फिल्म लेखक सूर्यपाल ने युवाओं से आभासी दुनिया के आकर्षण के बीच अपने वास्तविक लक्ष्यों और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। संचालन अभिमन्यु सिंह राठौड़ ने किया।

गुरु तेग बहादुर के बलिदान की प्रासंगिकता पर विमर्श

‘हिंद की चादर : गुरु तेग बहादुर जी और वर्तमान प्रासंगिकता’ विषय पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह मुख्य वक्ता रहे। सत्र में गुरु तेग बहादुर के जीवन, बलिदान और उनकी शिक्षाओं के समकालीन महत्त्व पर विचार हुआ। संचालन डॉ. बरखा ने किया।

लोककला के रंग, नाटकों में समरसता और शौर्य का संदेश

एकल लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने राजस्थान की लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत की। लोकनृत्य की प्रस्तुतियों को दर्शकों की सराहना मिली।रात्रिकालीन सत्र में जयपुर के युवतरंग संस्कृत नाट्य दल ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। स्वामी रामानंद से भेंट और ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की लोकप्रचलित कथा के माध्यम से श्रम की गरिमा, भक्ति और सामाजिक समानता का संदेश दिया गया। दीपक भारद्वाज द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक में अर्जुन देव, संदीप कुमार शर्मा, भारत भारद्वाज, तुषार शर्मा और योगिता वेदी सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया।दल की दूसरी प्रस्तुति ‘वीरांगना हीरा दे’ में जालौर की लोकप्रचलित शौर्यगाथा के माध्यम से कर्तव्य, साहस और स्वाभिमान को मंच पर उतारा गया। डॉ. राकेश कुमार जैन और दीपक भारद्वाज द्वारा लिखित नाटक का निर्देशन दीपक भारद्वाज ने किया।

पुस्तक मेले में साहित्य, इतिहास और संस्कृति की पुस्तकों के प्रति रुचि
संगम परिसर में लगे पुस्तक मेले में साहित्य, इतिहास, भारतीय संस्कृति और समकालीन विषयों से जुड़ी पुस्तकें उपलब्ध रहीं। विद्यार्थियों, साहित्य प्रेमियों और अन्य आगंतुकों ने पुस्तकों का अवलोकन किया तथा अपनी रुचि के अनुसार खरीदारी की। वैचारिक सत्रों और सांस्कृतिक गतिविधियों के बीच पुस्तक मेले ने पाठकों को विभिन्न विषयों के साहित्य से परिचित होने का अवसर दिया।

रविवार को हनुमान सिंह राठौड़ और राजवीर सिंह चलकोई के विशेष सत्र
शेखावाटी साहित्य संगम में रविवार, 11 अक्टूबर को प्रारंभिक सत्र में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ का व्याख्यान होगा। वहीं स्प्रिंग बोर्ड से जुड़े इतिहास वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ऐतिहासिक वीरों की पृष्ठभूमि पर विशेष सत्र को संबोधित करेंगे। इसमें राजस्थान के इतिहास और वीर परंपरा से जुड़े प्रसंगों पर चर्चा होगी।

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