नई दिल्ली : गणेश चतुर्थी आस्था, भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का पर्व है। भगवान गणपति को विघ्नहर्ता, बुद्धि, विवेक, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसी धार्मिक भावना को बनाए रखते हुए ज्यूडिशियल काउंसिल ने देशवासियों से अपील की है कि गणपति विसर्जन को पर्यावरण-अनुकूल और जिम्मेदार तरीके से किया जाए।ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन एवं लॉयर्स फेडरेशन के अध्यक्ष राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि “गणपति ने कभी नहीं कहा कि आप सभी लोग झूठी परंपरा निभाएँ और मुझे विसर्जन के नाम पर नदियों, नालों और तालाबों में डुबो दें।” उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। वास्तव में प्रकृति की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी और संस्कार का हिस्सा होना चाहिए। जलस्रोत केवल मनुष्य के लिए ही नहीं, बल्कि मछलियों, जलीय जीवों, पक्षियों और पूरे पर्यावरणीय तंत्र के लिए जीवन का आधार हैं।श्री अग्निहोत्री ने श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन किया कि गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित एवं अधिकृत विसर्जन स्थलों पर ही करें। जहाँ उपलब्ध हो, वहाँ कृत्रिम विसर्जन कुंड अथवा निर्धारित पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था का उपयोग किया जाए।उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फूल-माला, प्लास्टिक, सजावटी सामग्री और अन्य पूजा सामग्री को सीधे नदियों, नालों या तालाबों में न डाला जाए। निर्माल्य के लिए अलग व्यवस्था अपनाकर जलस्रोतों को स्वच्छ रखने में सहयोग किया जा सकता है।read more:https://pahaltoday.com/mobile-court-visits-ballia-to-hear-grievances-of-persons-with-disabilities-state-commissioner-issues-strict-directives/
राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि गणपति प्रतिमा को सम्मानपूर्वक किसी जरूरतमंद, भक्त या श्रद्धालु को भेंट करना भी एक सकारात्मक विकल्प हो सकता है। जिस प्रतिमा के सामने परिवार ने श्रद्धा और प्रेम से पूजा की है, वही प्रतिमा किसी दूसरे परिवार के लिए भी आस्था, आशा और मंगल का माध्यम बन सकती है।उन्होंने कहा, “भगवान की भक्ति केवल एक स्थान या एक परिवार तक सीमित नहीं है। यदि हमारी श्रद्धा किसी दूसरे भक्त की श्रद्धा को आगे बढ़ाती है और साथ ही प्रकृति को नुकसान से बचाती है, तो यह निश्चित रूप से एक सराहनीय पहल है।”ज्यूडिशियल काउंसिल ने कहा कि उत्सव की खुशी के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को जोड़ना समय की आवश्यकता है। समाज को ऐसी परंपराओं को प्रोत्साहित करना चाहिए जिनमें धार्मिक भावना, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी साथ-साथ चलें।उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे अपने परिवारों और समाज में “पर्यावरण-अनुकूल गणपति” का संदेश फैलाएँ और लोगों को जागरूक करें कि भगवान गणपति के प्रति सच्ची श्रद्धा प्रकृति के प्रति सम्मान से भी जुड़ी है।अग्निहोत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ नदियाँ, तालाब और सुरक्षित जल-जीवन देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। गणपति उत्सव को केवल पूजा और उत्सव तक सीमित न रखकर इसे प्रकृति संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का अभियान भी बनाया जा सकता है।उन्होंने देशवासियों से अपील की कि इस गणेश चतुर्थी पर संकल्प लें कि आस्था के नाम पर जलस्रोतों को प्रदूषित नहीं करेंगे, निर्धारित विसर्जन व्यवस्था का पालन करेंगे और पर्यावरण संरक्षण को अपनी धार्मिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाएँगे।ज्यूडिशियल काउंसिल का संदेश “विसर्जन करें, लेकिन जलस्रोत और जल-जीव भी बचाएँ। गणपति को विदाई दें, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना।