हापुड़ । अल्लाह तआला के फ़ज़्ल व करम से मुहम्मद असद ज़ाहिद, मुतअल्लिम मदरसा अरबिया फ़ातिमा, मस्जिद खुर्जा ने नाज़िरा-ए-क़ुरआन-ए-करीम मुकम्मल करने की मुबारक सआदत हासिल की। इस खुशी के मौक़े पर उनके वालिदैन, अहले ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों ने खुशी का इज़हार करते हुए अल्लाह तआला का शुक्र अदा किया और असद ज़ाहिद के रोशन मुस्तक़बिल के लिए दुआ की।
क़ुरआन-ए-करीम अल्लाह रब्बुल आलमीन की मुक़द्दस किताब है, जो इंसानियत के लिए हिदायत, रहनुमाई और कामयाबी का मुकम्मल ज़रिया है। इसकी तिलावत और तालीम हासिल करना हर मुसलमान के लिए बड़ी सआदत है। क़ुरआन-ए-करीम से जुड़ना इंसान की ज़िंदगी में नूर और बरकत का ज़रिया बनता है।इस मौक़े पर असद ज़ाहिद के वालिद मोहतरम क़ारी मुहम्मद ज़ाहिद क़ासिम, नाज़िम-ए-आला मक्तब मुआज़ बिन जबल, मुहम्मदपुर कलाँ, बुलंदशहर ने कहा कि बेटे का क़ुरआन-ए-करीम मुकम्मल करना उनके लिए बेहद खुशी और शुक्र का मौक़ा है। उन्होंने कहा कि बच्चे को क़ुरआन-ए-करीम की तालीम से आरास्ता करना वालिदैन के लिए बहुत बड़ी खुशक़िस्मती है। यह अल्लाह तआला का फ़ज़्ल और करम है कि उन्होंने उनके बेटे को अपनी मुक़द्दस किताब पढ़ने और उसे मुकम्मल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाई।उन्होंने कहा कि क़ुरआन-ए-करीम केवल पढ़ने की किताब नहीं बल्कि पूरी ज़िंदगी को सही रास्ते पर चलाने वाला मुकम्मल दस्तूर-ए-हयात है। वालिदैन की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को दुनियावी तालीम के साथ-साथ दीन और क़ुरआन-ए-करीम की तालीम भी दिलाएं।वहीं असद ज़ाहिद के उस्ताद-ए-मुहतरम ने कहा कि असद ज़ाहिद बहुत मेहनत और शौक़ के साथ क़ुरआन-ए-करीम की तालीम हासिल करता है।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/उसकी पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी, लगन और मेहनत क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। उन्होंने कहा कि असद ज़ाहिद ने जिस तरह मेहनत और लगन के साथ नाज़िरा-ए-क़ुरआन-ए-करीम मुकम्मल किया है, उससे उम्मीद है कि वह इंशाअल्लाह जल्द ही हाफ़िज़-ए-क़ुरआन बनने की मंज़िल भी हासिल करेगा।उस्ताद ने कहा कि असद ज़ाहिद को इंशाअल्लाह हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन कराया जाएगा और उसे क़ुरआन-ए-करीम का हाफ़िज़ बनाने की पूरी कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चा बहुत मेहनत और शौक़ से पढ़ता है, इसलिए उन्हें पूरा भरोसा है कि अल्लाह तआला के फ़ज़्ल से वह जल्द ही क़ुरआन-ए-करीम हिफ़्ज़ करने की सआदत हासिल करेगा। उन्होंने असद ज़ाहिद के लिए दुआ करते हुए कहा कि अल्लाह तआला उसे क़ुरआन-ए-करीम अपने सीने में महफ़ूज़ करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए और उसके इल्म व अमल में बरकत दे।उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का क़ुरआन-ए-करीम मुकम्मल करना उसके परिवार और उस्ताद के लिए भी खुशी का मौक़ा होता है। क़ुरआन-ए-करीम की तालीम देना बड़ी दीन की ख़िदमत है और इसके लिए मेहनत करने वाले उस्ताद भी मुबारकबाद के मुस्तहिक़ हैं।इस मौक़े पर क़ारी मुहम्मद ज़ाहिद क़ासिम ने अपने बेटे के उस्ताद का तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, तवज्जो, शफ़क़त और लगातार रहनुमाई की बदौलत असद ज़ाहिद ने नाज़िरा-ए-क़ुरआन-ए-करीम मुकम्मल किया। उन्होंने कहा कि उस्ताद की यह मेहनत यक़ीनन क़ाबिल-ए-क़द्र है और अल्लाह तआला उनकी इस दीन की ख़िदमत को सदक़ा-ए-जारीया बनाए।
अंत में क़ारी मुहम्मद ज़ाहिद क़ासिम ने दुआ की कि अल्लाह तआला मुहम्मद असद ज़ाहिद के दिल को क़ुरआन-ए-करीम के नूर से मुनव्वर करे, उसे क़ुरआन का सच्चा आशिक़, बा-अमल मुसलमान और दीन का मुख़लिस ख़ादिम बनाए। उसे जल्द हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन मुकम्मल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए और क़ुरआन-ए-करीम को उसकी ज़िंदगी का दस्तूर बनाए। उन्होंने तमाम अहबाब, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों से असद ज़ाहिद और उनके उस्ताद-ए-मुहतरम के लिए ख़ुसूसी दुआओं की दरख़्वास्त की।