नई दिल्ली: यूक्रेन द्वारा किए जा रहे लगातार ड्रोन हमलों ने दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शुमार रूस के ऊर्जा ढांचे की कमर तोड़ दी है।रिफाइनरियों पर हुए भीषण हमलों के चलते रूस में घरेलू स्तर पर पेट्रोल उत्पादन में 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस ईंधन संकट से निपटने के लिए रूस को अब भारत से पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है। एनर्जी इंटेलिजेंस और ट्रैकिंग फर्म वॉर्टेक्सा (Vortexa) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में रूस का समुद्री मार्ग से पेट्रोल आयात रिकॉर्ड 1,25,000 बैरल प्रतिदिन (लगभग 4.7 लाख टन) तक पहुंच गया है।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/
गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी की अहम भूमिका
व्यापार सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने पिछले दो महीनों में रूस को लगभग 10 लाख बैरल पेट्रोल का निर्यात किया है। इस आपूर्ति में गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी ने सबसे मुख्य भूमिका निभाई है, जिसका संचालन नयारा एनर्जी (Nayara Energy) करती है। उल्लेखनीय है कि नयारा एनर्जी में रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
रूसी कच्चे तेल से ही पेट्रोल बनाकर मॉस्को भेज रहा भारत
रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के बाद से भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।जून और जुलाई के दौरान भारत ने रूस से प्रतिदिन 26 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल आयात किया, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक बेहद दिलचस्प चक्र बन चुका है—भारत रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है और फिर अपनी अत्याधुनिक रिफाइनरियों में उसे प्रोसेस कर पेट्रोल के रूप में वापस रूस को निर्यात कर रहा है।
पेट्रोल–डीजल के निर्यात पर रूस में कड़े प्रतिबंधघरेलू बाजार में ईंधन की किल्लत और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए मॉस्को ने कड़े कदम उठाए हैं। रूस ने पेट्रोल निर्यात पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को उत्पादकों और गैर-त्पादकों दोनों के लिए जनवरी 2027 के अंत तक बढ़ा दिया है, जबकि डीजल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लागू है। अगस्त में रूस को पेट्रोल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में भारत के अलावा तुर्किये और मोरक्को शामिल रहे। वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में रूस पहुंचे कुल पेट्रोल आयात का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 2.6 लाख टन) उन जहाजों के जरिए पहुंचाया गया जो पश्चिमी प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं।