शिव-पार्वती विवाह प्रसंग ने मोहा मन, भक्ति में झूमे श्रद्धालु

शेरकोट । नगर के मोहल्ला फतेहनगर स्थित गढ़ी मंदिर में चल रही मोक्षदायिनी शिवमहापुराण कथा में रविवार शाम शिव-पार्वती विवाह का मनोहारी प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास पीठाधीश्वर पंडित राजेंद्र वशिष्ठ ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए।कथाव्यास ने कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। शिव विवाह के दौरान देवताओं, ऋषि-मुनियों, गणों और योगियों से सजी भगवान शिव की बारात का भी विस्तार से वर्णन किया गया।उन्होंने बताया कि भगवान शिव के विचित्र स्वरूप को देखकर माता मैना पहले चिंतित हो गई थीं, लेकिन भगवान शिव ने अपना दिव्य स्वरूप दिखाकर सभी की शंकाएं दूर कर दीं। उन्होंने कहा कि शिव-पार्वती का दांपत्य जीवन प्रेम, विश्वास, त्याग, समर्पण और मर्यादा का संदेश देता है। परिवार में सुख-शांति और आपसी प्रेम बनाए रखने के लिए उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।शिव विवाह प्रसंग के दौरान कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे। बबीता शर्मा, हर्ष, नितिन शर्मा, सरोज शर्मा, राजेंद्र शर्मा, बबीता राजपूत, सरिता देवी, मीना शर्मा, शोभा, नीलम शर्मा, हिमांशु राजपूत, कामेश्वर राजपूत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। पंडाल में हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे। अंत में आरती कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।read more:https://pahaltoday.com/cmo-saved-the-lives-of-passengers-injured-in-a-road-accident/
 बिजनौर बैराज का तटबंध पूरी तरह सुरक्षित, भ्रामक खबरों पर विश्वास ना करें
बिजनौर। बिजनौर बैराज के तटबंध के टूटने और करीब 100 मीटर कंक्रीट ब्लॉक के गंगा नदी में समा जाने संबंधी खबरों को सिंचाई विभाग ने पूरी तरह असत्य और भ्रामक बताया है। विभाग की ओर से जारी खंडन में कहा गया है कि तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और कहीं भी कटान अथवा टूट-फूट की स्थिति नहीं है।सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा नदी के बाएं तटबंध पर करीब एक किलोमीटर लंबाई में आधुनिक एसीबीएम तकनीक से सुरक्षात्मक कार्य कराया गया है। इसके तहत तटबंध के स्लोप पर करीब 8 से 10 मीटर तथा आगे 24 से 26 मीटर तक एप्रन के रूप में एसीबीएम बिछाई गई है।विभाग ने स्पष्ट किया कि एसीबीएम तकनीक में नदी के तेज बहाव और तटबंध पर पड़ने वाले दबाव के दौरान एप्रन का अपनी निर्धारित स्थिति से ‘लॉन्च’ होना तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बाद यह नदी की धारा के सामने सुरक्षा दीवार की तरह फैलकर तटबंध को कटाव से बचाने का काम करता है।वर्तमान में गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण कुछ स्थानों पर एसीबीएम एप्रन का नियमानुसार ‘लॉन्च’ होना शुरू हुआ है। विभाग के मुताबिक इसे किसी प्रकार की क्षति या दुर्घटना का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
24 घंटे तटबंध की निगरानी
सिंचाई विभाग ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण और तटबंध की सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। तटबंध की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। नदी के तेज बहाव का प्रभाव कम करने के लिए आवश्यक स्थानों पर ‘बल्ला कटर’ तथा मिट्टी से भरे नायलॉन क्रेट (बोरे) लगाए जा रहे हैं।विभाग की टीम को किसी भी संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है। अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि वे अपुष्ट एवं भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें और तटबंध की स्थिति को लेकर प्रशासन एवं सिंचाई विभाग की आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।यह खंडन कार्यालय अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर निर्माण खंड-5, सिंचाई विभाग बिजनौर की ओर से जारी किया गया है।

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