*गाजियाबाद।* जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियां कभी-कभी इंसान को पूरी तरह तोड़ देती हैं, लेकिन यदि कठिन समय में सही सहयोग और अवसर मिल जाए तो जीवन को फिर से नई दिशा दी जा सकती है। गाजियाबाद निवासी नवनीत और उनकी दिव्यांग पत्नी की कहानी इसी विश्वास, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल है।दिनांक *26 अप्रैल 2026* को बीमारी के बाद उनके 17 वर्षीय इकलौते पुत्र का निधन हो गया। पुत्र ही परिवार का एकमात्र सहारा था और उसकी छोटी-सी आय से किसी तरह परिवार का भरण-पोषण हो रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी तथा उन्हें दिव्यांग पेंशन के रूप में मात्र ₹1,000 प्रतिमाह प्राप्त होती थी। पुत्र के उपचार में परिवार की बची हुई जमा पूंजी भी खर्च हो गई और कर्ज का बोझ बढ़ता चला गया।ऐसे कठिन समय में नीव शक्ति संस्था एवं गाजियाबाद जिला प्रशासन ने परिवार की परिस्थितियों को समझते हुए उन्हें रोजगार से जोड़ने की पहल की। इसी क्रम में दंपति को दिव्यांग खोखा उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्हें स्वयं का रोजगार शुरू करने का अवसर मिला।आज यही छोटा-सा खोखा नवनीत जी और उनकी पत्नी के लिए आत्मनिर्भरता, सम्मान और नई उम्मीद का माध्यम बन गया है। दोनों पति-पत्नी मिलकर इस रोजगार को संचालित कर रहे हैं और मेहनत एवं लगन से अपने परिवार की आजीविका चला रहे हैं। इससे उन्हें दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने श्रम से सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिला है।
लाभार्थी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जताया आभार
लाभार्थी नवनीत जी ने कहा कि, “हमने अपने जीवन में बहुत बड़ा दुख देखा है। बेटे को खोने के बाद हमारे सामने परिवार चलाने की भी बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। ऐसे समय में नीव शक्ति संस्था और गाजियाबाद जिला प्रशासन ने हमारा साथ दिया। हमें केवल खोखा नहीं मिला, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला। इसके लिए हम उत्तर प्रदेश सरकार एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के हृदय से आभारी हैं। सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए संचालित योजनाओं से हमें नई उम्मीद और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।”उन्होंने कहा कि आज वह और उनकी पत्नी मेहनत कर अपना रोजगार चला रहे हैं और सम्मान के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने *उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी तथा जिला प्रशासन गाजियाबाद* का धन्यवाद ज्ञापित किया।
शासकीय योजनाओं का उद्देश्य—सहायता से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता
जिला प्रशासन द्वारा दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों से जोड़कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस प्रकार के प्रयासों का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार, सम्मान और स्वावलंबन के अवसर प्रदान करना है।नवनीत और उनकी पत्नी की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।यह कहानी संदेश देती है कि “दया नहीं, अवसर; सहानुभूति नहीं, सम्मान; और सहायता नहीं, आत्मनिर्भरता” ही सशक्त समाज की दिशा है। सही समय पर मिला एक अवसर किसी कठिन परिस्थिति से जूझ रहे परिवार के जीवन में नई उम्मीद और नई राह पैदा कर सकता है।