श्रीगंगानगर के गाँवो की अनोखी पहचान,जीबी नामों में बसा सिंचाई की पद्धति का राज

अमित बिश्नोई 12 जीबी,13 जीबी,14 जीबी,15 जीबी,16 जीबी आदि नामों को सुनकर आपको किसी स्मार्टफोन की स्टोरेज या इंटरनेट डाटा का लगता होगा। लेकिन अगर आपको कोई कहे कि ये गांवों के नाम है तो आप हैरान मत होना, दरअसल ये राजस्थान के श्रीगंगानगर जिल में बसे हुए गांव है इन गांवों के नामों कि पहचान इसलिए अलग है क्योंकि इनका नाम सिंचाई पद्धति के अनुसार रखा गया है, यह नाम श्री गंगानगर और आसपास के इलाकों में सामान्य रूप से प्रचलन में है। लेकिन अगर कोई इस जिले से बाहर के या अन्य राज्य के लोग इसको सुनते है तो सोच में पड़ जाते है।श्रीगंगानगर, राजस्थान का सबसे उत्तरी जिला और शहर, पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जो बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह के नाम से श्रीगंगानगर पड़ा। जो भारत के पहले नियोजित शहरों में से एक है, यह नियोजन पेरिस से प्रेरित माना जाता है।इस जिले में गंग नहर प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। गंग नहर श्रीगंगानगर के ख‌ंखा गाँव से राजस्थान में प्रवेश करती है। बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह के द्वारा ही गंग नहर का निर्माण हुआ। और सतलुज नदी का पानी राजस्थान में लाया जा सका।4 दिसम्बर, 1920 को बीकानेर भावलपुर और पंजाब राज्यों के बीच सतलुज नदी घाटी समझौता हुआ। जिसमें गंग नहर की आधारशिला फ़िरोज़पुर हैडबाक्स पर 5 सितम्बर, 1921 को महाराजा गंगासिंह द्वारा रखी गई। 26 अक्टूबर, 1927 को तत्कालीन वॉयसरॉय लॉर्ड इरविन ने श्रीगंगानगर के शिवपुर हैंडबॉक्स पर इस नहर का उद्घाटन किया। यह नहर सतलुज नदी से पंजाब के फिरोजपुर के हुसैनीवाला से निकाली गई है। जो शिवपुर, श्रीगंगानगर, जोरावरपुर , पदमपुर, रायसिंहनगर, सादुलशहर से होती हुई अनूपगढ़ तक जाती है।

read more:https://pahaltoday.com/district-magistrate-holds-meeting-of-the-district-drinking-water-and-sanitation-mission-issues-directives/इसकी कुल लंबाई लगभग 129 किमी, जबकि वितरिकाओं सहित 1280 किमी तक फैली हुई है। लक्ष्मीनारायण जी, लालगढ़ , करणीजी समीक्षा नहर की मुख्य शाखा है। श्रीविजयनगर की तहसील श्रीगंगानगर जिले की पूर्वी तहसील के समीप है, जिसमे कई जीबी नंबर वाले सिंचाई से जुड़े गाँव है। श्री विजयनगर तहसील का नाम राजस्थान बीकानेर राज्य से संबंधित राजकुमार विजय सिंह के नाम पर गया गया है। अधिकतर जीबी नंबर वाले गाँव इसी तहसील में हैं। यह क्षेत्र कृषि प्रधान है, जहाँ सिंचाई के लिए गंग नहर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । इस नहर के आने से यहां सरसों, कपास, गन्ना, चना, बाजरा और कीनू जैसी फसलों का उत्पादन तेज़ी से होने लगी। इस क्षेत्र के अनेक गाँव जो जीबी नम्बरो वाले गाँव के नाम से जाने जाते है। इनमें प्रमुख रूप से 15 जीबी , 22 जीबी, 23 जीबी, 24 जीबी, 28 जीबी, 25 जीबी, 11 जीबी , 19 जीबी , 10 जीबी, 20 जीबी 18 जीबी, 17 जीबी, 16 जीबी, 15 जीबी, 21 जीबी, 14 जीबी 12 जीबी नंबर वाले गांव है। जब कोई व्यक्ति इन नामो की पहली बार सुनता है तो कुछ क्षण तो वह सोच में डूब जाता है । लेकिन इनका नाम एक खास सिंचाई पद्धति के अनुसार रखा गया है। इसमे जीबी का मतलब गंग ब्रांच है। जो गाँवों की पहचान और सिंचाई प्रबन्धन के लिए महत्वपूर्ण है। जीबी नाम रखने से नहर की शाखाओं के बीच जल वितरण, मरम्मत, जल प्रवाह नियंत्रण रहता है। जिससे सिंचाई के क्षेत्र को स्पष्ट ब्लॉक में विभाजित किया जा सके।साथ ही इन नामों का प्रयोग राजस्व अभिलेखों, जमाबंदी रिकार्ड सिंचाई विभाग के दस्तावेज और सरकार की योजनाओं में होता है। इसके माध्यम से जल वितरण व्यवस्था पारदर्शी और वैज्ञानिक योजनाबद्ध तरीके से होती है। क्योंकि यह क्षेत्र गंग नहर के आने के बाद आबादी वाला क्षेत्र बन गया है इसलिए सिंचाई के साथ-साथ पीने के पानी की आवश्यकता भी होती है। इसी कारण यह पद्धति योजनाबद्ध तरीके से चल रही है। इस क्षेत्र में सिंचाई व पीने के पानी और सरकारी दस्तावेजों में रिकॉर्डों को संचारू रूप से चलाने के लिए सभी गाँवो का नाम जीबी नम्बरो पर रखा गया है।

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