बाराबंकी। शहर में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल एक बार फिर खड़े हो गए हैं। बीते 7 जुलाई को माल गोदाम रोड पर स्कूल जा रहे मासूम हर्षवर्धन तिवारी की ट्रक से कुचलकर हुई दर्दनाक मौत के बाद भी जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली में कोई बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। शहर में नो एंट्री के निर्धारित समय के दौरान भी भारी वाहन बेरोकटोक सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, जिससे स्कूली बच्चों और आम लोगों की जान पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। आज बुधवार को दोपहर स्कूलों की छुट्टी के समय भारी ट्रकों और अन्य बड़े वाहनों की आवाजाही बाराबंकी एक्सप्रेस के कैमरे में कैद हुई। यह वही मार्ग है, जहां प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं स्कूल से घर लौटते हैं। देवा रोड पर शहर का प्रतिष्ठित आनंद भवन स्कूल स्थित है। इसके अलावा कई अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानो जिनमेंकृसेंट एंथोनी स्कूल, सैनिक पब्लिक स्कूल व अन्य निजी एवं सरकारी विद्यालय शामिल हैं। इन स्कूलों के हज़ारों छात्र प्रतिदिन इसी मार्ग से होकर अपने घर जाते हैं। ऐसे में स्कूल टाइम में भारी वाहनों की मौजूदगी किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसी स्थिति पैदा कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो हर्षवर्धन जैसी घटना दोबारा भी हो सकती है। गौरतलब है कि 7 जुलाई 2026 को मालगोदाम रोड पर स्कूल जा रहे ओम नगर, बंकी नई बस्ती निवासी हर्षवर्धन तिवारी की ट्रक की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था और लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का भरोसा दिया था, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी अलग नजर आ रही है। बीते 21 जुलाई को स्व. श्री अवध बिहारी मिश्र सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं आंदोलनकारी अधिवक्ता रितेश कुमार मिश्र के नेतृत्व में दर्जनों अधिवक्ताओं द्वारा जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह जनहित ज्ञापन सौंपकर शहर में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों पर रोक लगाने और स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। ज्ञापन में प्रमुख रूप से स्कूल टाइम में भारी वाहनों की नो-एंट्री सख्ती से लागू करने की मांगी की गई है। जिसके अर्न्तगत सुबह 6 बजे से 10 बजे तक शहर की आबादी वाले क्षेत्रों में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए और इसका कड़ाई से पालन कराया जाए। वहीं दूसरी मांग दुर्घटना संभावित मार्गों पर डिवाइडर का निर्माण कराने की है। शहर के व्यस्त एवं दुर्घटना संभावित मार्गों पर जल्द से जल्द डिवाइडर बनाकर सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जाए। इसके अलावा स्कूलों के बाहर पुलिस तैनाती अनिवार्य करने की मांग है।read rore:https://khabarentertainment.in/prof-dr-rajendra-rajput-receives-guru-shree-2026-award-at-national-level-brings-honour-to-ghazipur/ताकि सुबह 6 बजे से 9 बजे तक स्कूल खुलने के समय प्रमुख चौराहों, स्कूलों और संवेदनशील मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षित आवाजाही हो सके। वहीं हाईवे पर लगने वाले भारी वाहनों के जमावड़े पर रोक लगाने की मांग है। ताकि नो-एंट्री शुरू होने से पहले शहर और हाईवे के किनारे लगने वाले भारी वाहनों के जमावड़े को तत्काल समाप्त कराया जाए, जिससे सड़कें जाम और दुर्घटनामुक्त रह सकें। इसके अलावा ट्रैफिक प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग की गई है। शहर में यातायात व्यवस्था को वैज्ञानिक और प्रभावी बनाते हुए सड़क दुर्घटनाओं पर स्थायी रूप से अंकुश लगाने के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू की जाए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना ट्रैफिक पुलिस की मिलीभगत के नो-एंट्री के निर्धारित समय, विशेषकर स्कूलों की छुट्टी के दौरान भारी वाहनों का शहर की सड़कों पर बेखौफ दौड़ते रहना संभव नहीं हैं। लोगों का कहना है कि यदि ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए तो ऐसी स्थिति संभव ही नहीं हो सकती। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन नो-एंट्री व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करे और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।