पुलिस सुना रही फैसला, भूमि को लेकर भटक रहा गरीब परिवार

ओबरा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोटा के बरसौना टोला में एक आदिवासी परिवार की भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। पीड़ित परिवार ने जमीन पर जबरन कब्जा कराने, पुलिस की कथित मिलीभगत और राजस्व विभाग की उदासीनता के आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।बरसौना निवासी बुद्धिराम ने बताया कि करीब दस वर्ष पहले आर्थिक तंगी के चलते उन्होंने अपनी कृषि भूमि केवल जोत-कोड़ के लिए कोटा निवासी किशुन देव जायसवाल को 1,800 में दी थी। उनका आरोप है कि अब जमीन वापस करने के एवज में पहले 20 हजार, फिर 40 हजार और अब 1 लाख की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह अपनी जमीन वापस लेने के लिए भुगतान करने को भी तैयार हैं, लेकिन लगातार बढ़ाई जा रही रकम के कारण असहाय हैं। पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने 22 जुलाई 2026 को चोपन थाने में लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन कार्रवाई के बजाय पुलिस ने कथित रूप से विपक्षी को खेत जोतने की अनुमति दे दी।read more:https://khabarentertainment.in/509-vidyut-sakhis-in-bijnor-receive-thermal-printers-instant-electricity-bill-receipts-will-now-be-available-at-doorsteps/परिवार का यह भी आरोप है कि विरोध करने पर उनके साथ जातिसूचक एवं अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और कार्रवाई की धमकी दी गई। बुध्दिराम का कहना है कि उन्हें पुलिस की ओर से कहा गया कि यदि किशुन देव को खेत नहीं जोतने दिया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है। पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि भूमि की नापी (पैमाइश) कराने के लिए क्षेत्र के कानूनगो को 10 हजार दिए गए, लेकिन अब तक न तो जमीन की पैमाइश कराई गई और न ही उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की तो विवाद और गंभीर रूप ले सकता है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने, भूमि की पैमाइश कराने और उनकी जमीन पर कथित कब्जा रुकवाने की मांग की है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *