भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली प्रदेश सरकार में भी ओबरा क्षेत्र की एक खदान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि समाजवादी पार्टी से जुड़े एक खनन पट्टाधारक की मे. अजन्ता माइंस एंड मिनरल्स की खदान में नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन और निर्धारित सीमा से अधिक पत्थर का अवैध खनन किया जा रहा है। बावजूद इसके प्रशासनिक अमला सब कुछ जानते हुए भी मौन बना हुआ है।सूत्रों के अनुसार, खदान से एक वर्ष में 1,88,160 घनमीटर पत्थर निकालने की अनुमति है। यानी औसतन 15,680 घनमीटर प्रति माह और करीब 523 घनमीटर प्रतिदिन ही खनन किया जा सकता है। आरोप है कि निर्धारित सीमा से कहीं अधिक खनन कर करोड़ों रुपए का खेल चल रहा है, लेकिन इसकी निगरानी के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तक नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उप खनिज (परिहार) नियमावली-2021 के तहत खदान में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे, वाहनों की जांच के लिए तौल मशीन तथा सुरक्षा के लिए एम्बुलेंस अनिवार्य हैं। आरोप है कि संबंधित खदान में इनमें से कोई भी व्यवस्था मौके पर नहीं है। ऐसे में आखिर प्रतिदिन कितना खनन हो रहा है और कितने वाहनों से पत्थर बाहर जा रहा है, इसका कोई पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।raedmore:https://khabarentertainment.in/cunning-man-arrested-for-pressuring-woman-into-marriage-through-blackmail/स्थानीय लोगों का कहना है कि ओबरा तहसील क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस की नियमित मौजूदगी के बावजूद यदि नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है तो यह अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।अब सवाल यह है कि यदि खदान में अनिवार्य सुरक्षा और निगरानी उपकरण मौजूद नहीं हैं तो संबंधित विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया। क्या नियम केवल कागजों तक सीमित हैं या फिर प्रभावशाली लोगों के सामने प्रशासन भी बेबस नजर आ रहा है। उधर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर अपर जिलाधिकारी वागीश कुमार शुक्ला के सीयूजी नंबर पर काल कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे वार्ता नहीं हो सकी। एडीएम के अर्दली ने फोन रीसिव कर बोले कि साहब मीटिंग में है। बाद में वार्ता करें।