वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे मरीज के लिए ‘देवदूत’ बने युवा,

स्योहारा (बिजनौर)। “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना” और “रक्तदान ही महादान है”— इन कहावतों को धरातल पर सच कर दिखाया है । क्षेत्र के समाजसेवी युवाओं ने स्योहारा क्षेत्र में इंसानियत और भातृत्व की एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहाँ अस्पताल में वेंटिलेटर पर जीवन और मौत के बीच झूल रहे एक गंभीर मरीज के लिए दो युवकों ने समय गंवाए बिना रक्तदान कर उसकी सांसों की डोर को टूटने से बचा लिया।readmore:https://khabarentertainment.in/cattle-found-below-standards-and-shortage-of-fodder-observed-during-sdms-surprise-inspection/
वेंटिलेटर पर थे गंभीर मरीज राजीव, तत्काल खून की थी दरकार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम गेंडाजुड़ निवासी राजीव की तबीयत अत्यंत खराब होने पर उन्हें गंभीर हालत में चिकित्सक डॉ. मनोज वर्मा के चिकित्सालय वर्मा मैटरनिटी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। इलाज के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि मरीज के शरीर में रक्त का स्तर बेहद कम हो चुका है और यदि तुरंत इमरजेंसी में ब्लड नहीं मिला, तो अनहोनी हो सकती है। अचानक आई इस आकस्मिक विपदा से मरीज के परिजन बेहद घबरा गए और खून का इंतजाम करने के लिए दर-दर भटकने लगे।
खबर मिलते ही दौड़े चले आए ‘देवदूत’
जैसे ही इस गंभीर स्थिति और मरीज को तत्काल रक्त की आवश्यकता की जानकारी बहादरपुर निवासी आकाश तोमर और स्योहारा के मोहल्ला मालियान निवासी शोभित पुष्पक को हुई, उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। दोनों युवाओं ने अपनी सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारी को समझते हुए तुरंत अस्पताल पहुंचने का फैसला किया।
अस्पताल पहुंचकर धर्मनन्दा चैरिटेबल ब्लड सेंटर जाकर दोनों युवाओं ने बिना कोई झिझक तुरंत अपना रक्तदान (Blood Donate) किया। सही समय पर रक्त उपलब्ध हो जाने से चिकित्सकों को मरीज का इलाज आगे बढ़ाने में बड़ी मदद मिली, जिससे वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे राजीव की हालत में सुधार की उम्मीद जगी है।
क्षेत्र में हो रही युवाओं की जमकर सराहना
अस्पताल परिसर में मौजूद मरीज के परिजनों ने नम आंखों से दोनों दानवीर युवाओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे युवाओं की वजह से ही आज समाज में इंसानियत जिंदा है। स्योहारा और आसपास के क्षेत्र में आकाश तोमर और शोभित पुष्पक के इस त्वरित और सराहनीय कदम की चौतरफा प्रशंसा हो रही है।
“सच्चा मित्र और सच्चा इंसान वही है जो किसी की ढलती सांसों को अपनी नसों के खून से नया जीवन दे दे। शोभित पुष्पक और आकाश तोमर का यह प्रयास हम सभी के लिए एक मिसाल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *