नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 3 शातिर सदस्य गिरफ्तार. फर्जी दस्तावेज, 11 मोहर, ब्रेजा कार और नकदी बरामद

आजमगढ़ पुलिस ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी और निजी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन और शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से फर्जी दस्तावेज तैयार करने में प्रयुक्त 11 मोहरें, पुलिस वेरिफिकेशन प्रपत्र, आधार और पैन कार्ड की प्रतियां, नागालैंड सरकार के कूटरचित प्रपत्र, चार मोबाइल फोन, एक ब्रेजा कार और ₹5,360 नकद बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई के साथ ही इस गिरोह के गिरफ्तार सदस्यों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत रानी की सराय थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली। 26 और 27 जुलाई की रात वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुशील कुमार अपनी टीम के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान आजमगढ़, वाराणसी मार्ग पर कोटिला कट के पास एक ब्रेजा कार के निकट तीन व्यक्ति संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोककर पूछताछ की तो उनकी गतिविधियां संदिग्ध मिलीं। इसके बाद रात 11:55 बजे तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लालू उर्फ राकेश कुमार निवासी मधुबनी, बिहार तथा दिनेश कुमार गुप्ता और धर्मेन्द्र गुप्ता निवासी रसड़ा, जनपद बलिया के रूप में हुई है।पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी स्वयं को नौकरी दिलाने वाला एजेंट बताकर बेरोजगार युवाओं से मोटी रकम वसूलते थे। इसके बाद उन्हें भरोसा दिलाने के लिए फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और विभिन्न सरकारी कार्यालयों के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर देते थे।readmore:https://khabarentertainment.in/cunning-man-arrested-for-pressuring-woman-into-marriage-through-blackmail/इन फर्जी अभिलेखों के माध्यम से युवाओं को नौकरी दिलाने का झूठा विश्वास दिलाकर उनसे लाखों रुपये की ठगी की जाती थी।तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, 11 विभिन्न विभागों की मोहरें, इंकपैड, पुलिस वेरिफिकेशन प्रपत्र, नागालैंड सरकार के पांच कूटरचित प्रपत्र, आधार और पैन कार्ड की छायाप्रतियां, एक ब्रेजा कार तथा ₹5,360 नकद बरामद किए। बरामद सामग्री से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि गिरोह संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर ठगी के कारोबार को अंजाम देता था।पुलिस के अनुसार इस मामले में वादी पंकज यादव की तहरीर पर थाना रानी की सराय में मुकदमा अपराध संख्या 123/2026 भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में दर्ज किया गया है। मामले की गहन जांच जारी है।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह एक अंतरराज्यीय गिरोह है और अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 12 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इससे पहले नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, उनकी आर्थिक गतिविधियों और ठगी से अर्जित संपत्तियों की भी जांच कर रही है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे गिरोहों के विरुद्ध अभियान आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति या एजेंसी को धनराशि देने से पहले उसकी वैधता और प्रमाणिकता की पूरी जांच अवश्य करें।

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