नकुड़ (सहारनपुर)। नकुड़ क्षेत्र के गांव बाधी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं साहित्यकार सुनील कुमार खुराना का नाम गोल्डन बुक आॅफ वल्र्ड रिकाॅड्र्स में दर्ज किया गया है। उन्हें आईना हैरिटेज वल्र्ड रिकाॅर्ड प्रोजेक्ट के अंतर्गत साहित्यिक योगदान के वल्र्ड रिकाॅर्ड रिटरेरी पार्टीसिपेशन आॅनर सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। सुनील कुमार खुराना ने विश्व रिकॉर्ड परियोजना में ष्मानव और पर्यावरणष् विषय पर अपनी रचनात्मक भागीदारी निभाई। यह साहित्यिक पहल हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और साहित्यिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। यह परियोजना ।।प्छ।दृ।प् च्वूमतमक भ्पदकप स्पजमतंतल म्बवेलेजमउ के माध्यम से संचालित हुई, जिसका नेतृत्व डॉ. ममता सैनी, संस्थापक एवं प्रोजेक्ट निदेशक, डिजिटल एरा लिंक ने किया। इस अभियान में अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच का भी सांस्कृतिक सहयोग रहा। उन्हें जारी सम्मान प्रमाण-पत्र की आईडी आईना डब्ल्यूआर-000446 है, जिसकी प्रामाणिकता क्यूआर कोड के माध्यम से सत्यापित की जा सकती है।read more:https://khabarentertainment.in/administration-gears-up-for-kanwar-yatra-divisional-commissioner-issues-strict-directives/गांव बाधी के उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत सुनील कुमार खुराना पिछले कई वर्षों से साहित्य सृजन में सक्रिय हैं। पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ, वृक्षारोपण, नारी सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता जैसे सामाजिक विषयों पर उनकी 200 से अधिक रचनाएं विभिन्न साझा संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाएं सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती हैं। सुनील कुमार खुराना ने बताया कि उनकी कविताओं को लिखंतू वेबसाइट पर पिछले पांच महीनों में 16 लाख से अधिक बार पढ़ा जा चुका है। उनकी कविता का प्रसारण फरवरी 2025 में आकाशवाणी नजीबाबाद से ऑल इंडिया रेडियो पर भी हुआ था। वर्ष 2026 में उन्हें लगातार काव्य हिन्दुस्तान साहित्य शिखर सम्मान, कवि शिरोमणि सम्मान तथा अब गोल्डन बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्डस में स्थान मिलने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। उनकी इस सफलता पर शिक्षाविदों, साहित्यकारों और क्षेत्रवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे नकुड़, सहारनपुर और हिंदी साहित्य जगत के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।