रसूलाबाद विधानसभा में  मुकाबला फिर रोचक होने के आसार

कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। चुनाव अपने निर्धारित समय पर हों या समय से पहले, प्रदेश स्तर से लेकर विधानसभा स्तर तक सभी प्रमुख राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। कन्नौज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली रसूलाबाद विधानसभा सीट भी एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है, जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प रहने के संकेत मिल रहे हैं।read more:https://khabarentertainment.in/major-action-by-the-food-safety-department-sauce-factory-raided-550-kg-of-stock-destroyed/रसूलाबाद विधानसभा का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2012 में नए परिसीमन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता  व कई बार के विधायक शिवकुमार बेरिया ने ऐतिहासिक  जीत दर्ज की थी। लगातार दो बार सपा ने टिकट बदली तो  2017 में भारतीय जनता पार्टी की निर्मला संखवार और वर्ष 2022 में भाजपा की पूनम संखवार ने सीट पर जीत हासिल कर कमल खिलाया।हालिया राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को करीब 9,881 मतों की बढ़त नहीं मिल सकी और पार्टी को यहां पीछे रहना पड़ा। जो कि इस बार भाजपा के लिए चुनौती हो सकता है। विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है, जिससे आगामी मुकाबला और अधिक रोचक माना जा रहा है। इस बार पूर्व विधायक कमलेश चंद्र दिवाकर रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से दावेदारी कर रहे हैं तो चुनावी सरगर्मी और तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा की ओर से एक दर्जन से अधिक नेता टिकट की दौड़ में सक्रिय हैं। वहीं समाजवादी पार्टी में भी कई दावेदार अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। अगर समाजवादी किसी पुराने और दिग्गज को टिकट देगी तो भारतीय जनता पार्टी भी उस तुरुप के इक्के का इस्तेमाल कर सकती है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी बदले थे, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में इस बार पार्टी की रणनीति और प्रत्याशी चयन पर सभी की निगाहें रहेंगी। वहीं बहुजन समाज पार्टी का प्रभाव क्षेत्र में पहले की तुलना में कमजोर माना जा रहा है, जबकि भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला बनने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक दलों ने गांव-गांव जनसंपर्क, संगठनात्मक बैठकें और कार्यकर्ता सम्मेलन तेज कर दिए हैं। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि रसूलाबाद विधानसभा का ताज किसके सिर सजेगा, लेकिन इतना तय है कि यह सीट एक बार फिर जिले की सबसे चर्चित और कांटे की चुनावी लड़ाइयों में शामिल रहने वाली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *