डाला, सोनभद्र। डाला नगर पंचायत की मलिन बस्ती का वर्षों पुराना भूमि विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शनिवार को जिलाधिकारी चर्चित गौड़ एवं पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने विवादित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों के पहुंचने की सूचना पर बड़ी संख्या में बस्तीवासी हनुमान मंदिर परिसर में जुटे और अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं।बस्तीवासियों ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी द्वारा उन्हें भूमि खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि वे तीन पीढ़ियों से यहां निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि भूमि विवाद का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।स्थानीय प्रतिनिधि उमेश प्रसाद मेहता ने कहा कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के आशियाने और उनके अधिकारों का मामला है।read more:https://worldtrustednews.in/yogi-government-working-to-make-youth-skilled-in-line-with-industry-demand/ उन्होंने बताया कि पहले इस भूमि पर जेपी एसोसिएट्स दावा करती थी, जबकि अब अल्ट्राटेक कंपनी अपना दावा कर रही है। मामले में न्यायालय में पुनर्स्थापन (रेस्टोरेशन) याचिकाएं भी लंबित हैं।भाजपा जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रभावित परिवारों के समुचित पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना किसी भी परिवार को हटाना उचित नहीं होगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।स्थानीय निवासी घनश्याम प्रसाद कुशवाहा के अनुसार विवाद 338 प्रभावित परिवारों से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में कुछ लोगों को मुआवजा मिला था, लेकिन विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। बस्तीवासियों का दावा है कि क्षेत्र में करीब 500 मकानों में लगभग तीन हजार लोग रहते हैं तथा नगर पंचायत यहां करोड़ों रुपये के विकास कार्य करा चुकी है।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की। प्रशासन का कहना है कि स्थलीय निरीक्षण के आधार पर तथ्यों का परीक्षण कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में सभी की निगाहें उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।