ऑपरेशन “CyVazra” का बड़ा एक्शन, देशभर में साइबर ठगी फैलाने वाले 11 शातिर गिरफ्तार 684 शिकायतों का खुलासा, 10 लाख से अधिक राशि फ्रीज,

जहानागंज/आजमगढ़।उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष अभियान “ऑपरेशन CyVazra” के तहत आजमगढ़ पुलिस ने देशव्यापी साइबर अपराध नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। अभियान के दौरान 11 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि जांच में देशभर से दर्ज 684 से अधिक साइबर शिकायतों का खुलासा हुआ है। पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़ी 10.46 लाख रुपये की धनराशि विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कराई है। साथ ही लग्जरी वाहन, विदेशी सिम, हाई एंड मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, एटीएम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है।यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के नेतृत्व में की गई। अभियान की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन, अपर पुलिस अधीक्षक नगर मधुवन कुमार सिंह तथा अपर पुलिस अधीक्षक यातायात पंकज श्रीवास्तव ने की। साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक रवि प्रकाश गौतम और उनकी टीम के साथ जनपद के विभिन्न थानों की पुलिस ने तकनीकी जांच और खुफिया सूचना के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया।पुलिस के अनुसार राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर देशभर से प्राप्त 684 से अधिक शिकायतों का विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जनपद के विभिन्न थानों में कुल 13 मुकदमे दर्ज किए गए और 11 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना रहा था।कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक महिंद्रा थार, एक होंडा मोटरसाइकिल, एक प्लेटिना मोटरसाइकिल, कुल 13 हाई एंड मोबाइल फोन जिनमें आईफोन 16, सैमसंग, हुआवेई और ओप्पो जैसे ब्रांड शामिल हैं, एक विदेशी सिम कार्ड, बड़ी संख्या में फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र, फर्जी कंपनियों की रबर मुहरें, मालदीव वर्क परमिट से जुड़े कूटरचित दस्तावेज, 14 एटीएम और डेबिट कार्ड, चार ब्लैंक चेकबुक तथा 10,520 रुपये नकद बरामद किए हैं।पुलिस जांच में साइबर अपराध के कई संगठित मॉड्यूल सामने आए हैं। गिरोह के सदस्य बैंक खातों का दुरुपयोग करने के लिए फर्जी कंपनियां बनाते थे और बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम का लेनदेन करते थे। जांच में ऐसे खातों में तीन दिनों के भीतर लगभग 40 लाख रुपये तक के संदिग्ध लेनदेन के प्रमाण मिले हैं।जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का एक सदस्य इंटरनेट से मालदीव सरकार के वर्क परमिट का प्रारूप डाउनलोड कर उसमें फर्जीवाड़ा करता था। इसके बाद बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये की ठगी की जाती थी।read more:https://khabarentertainment.in/excise-department-raids-dhabas/एक अन्य मॉड्यूल में टेलीग्राम पर फर्जी गेमिंग, कैसीनो और ऑनलाइन लॉटरी चैनल संचालित किए जाते थे। लोगों को कम समय में अधिक लाभ का लालच देकर ऑनलाइन पैसा मंगाया जाता था और भुगतान मिलते ही पीड़ितों को ब्लॉक कर दिया जाता था।जांच के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से अश्लील सामग्री बेचने और ब्लैकमेलिंग का मामला भी सामने आया। पुलिस के अनुसार एक अभियुक्त टेलीग्राम पर फर्जी ग्रुप संचालित कर ऑनलाइन भुगतान के बदले अश्लील फोटो और वीडियो उपलब्ध कराता था। प्रारंभिक जांच में इस माध्यम से लोगों को ब्लैकमेल कर अवैध धन उगाही किए जाने के संकेत भी मिले हैं।पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों से यह भी पता चला कि गिरोह फर्जी पहचान पत्र, मोबाइल सिम, बैंक खाते और एटीएम कार्ड का उपयोग कर देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और साइबर अपराध से अर्जित संपत्तियों की गहन तकनीकी जांच कर रही है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि आजमगढ़ पुलिस साइबर अपराध के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। साथ ही आमजन से अपील की गई कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि को सुरक्षित कराया जा सके और अपराधियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जा सके।

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