तेहरान। जब भी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है, दुनिया की नजरें सबसे पहले तेल की कीमतों और होर्मुज स्ट्रेट टिकती हैं। यह समझना भी गलत नहीं है क्योंकि दुनिया के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता है और ईरान के पास दुनिया के 12 फीसदी तेल भंडार हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष की वजह सिर्फ तेल तक सीमित नहीं, बल्कि ईरान की धरती के नीचे दबा दुर्लभ खनिजों का अथाह भंडार है, जिसका कुल अनुमानित मूल्य करीब 27.5 ट्रिलियन डॉलर है। read more:https://khabarentertainment.in/prof-dr-rajendra-rajput-receives-guru-shree-2026-award-at-national-level-brings-honour-to-ghazipur/रिपोर्ट के अनुसार, ईरान दुनिया के कुल खनिज भंडार का 15 फीसदी हिस्सा रखता है। देश में 68 से अधिक प्रकार के खनिज मिलते हैं, जिससे यह प्राकृतिक संसाधनों के मामले में दुनिया में 5वें स्थान पर है। लेड और जिंक के विशाल भंडार ईरान का एक बड़ा सामरिक हथियार हैं। देश के पास दुनिया के कुल लेड और जिंक भंडार का 3 फीसदी हिस्सा है, जिसमें 220 मिलियन टन से अधिक का प्रमाणित भंडार मौजूद है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान दुनिया का सबसे बड़ा जिंक भंडार रखता है।इसके अलावा, ईरान के पास 2.6 बिलियन मीट्रिक टन तांबा (दुनिया के कुल का 5 प्रतिशत), यूरेनियम, 86 लाख टन लिथियम (इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी के लिए महत्वपूर्ण) और दुनिया का 7वां सबसे बड़ा लौह अयस्क भंडार है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने अभी तक अपने गहरे भूमिगत भंडारों की पूरी तरह से खोज नहीं की है, जिससे संभावना है कि यह खजाना और भी विशाल हो सकता है।ये खनिज केवल पत्थर नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक की रीढ़ हैं। जिंक, लेड, तांबा और लिथियम इलेक्ट्रिक वाहनों, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा उपकरणों के लिए अपरिहार्य हैं। सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) की रिपोर्ट के अनुसार, ये ईरान को क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक दौड़ में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाते हैं। जी7 देश चीन पर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की निर्भरता कम करना चाहते हैं, और इस प्रयास में ईरान एक संभावित विकल्प के रूप में उभर सकता है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान अपने खनिज क्षेत्र की पूरी क्षमता का दोहन नहीं कर पा रहा है। मशीनरी और तकनीक तक पहुंच की कमी के बावजूद, ईरान एशियाई बाजारों, खासकर चीन के साथ अपने खनिज व्यापार को मजबूत कर रहा है। अंततः, यह स्पष्ट है कि ईरान से जुड़ा भू-राजनीतिक संघर्ष सिर्फ तेल तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने वाले रणनीतिक खनिजों के एक अप्रयुक्त खजाने पर भी केंद्रित है।