गंगोह। कथा वाचक ने कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है। यहां चैरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मो द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सजनों का उद्धार और दुर्जनों का संघार किया करते हैं। सराय पट्टी स्थित रामलीला भवन में आयोजित बंब श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य सरस महाराज ने समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है। कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का चितन मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का चितन मंथन चलता रहता।read more:https://khabarentertainment.in/relief-rain-falls-from-the-sky-in-bhadohi-the-carpet-city/ उन्होंने बताया कि जिसके अंदर के दानव जीत गया उसका जीवन दुरूखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा और जिसके अंदर के देवता जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा। इसलिए हमेशा अपने विचारों पर पैनी नजर रखते हुए बुरे विचारों को अच्छे विचारों से जीतते हुए अपने मानव जीवन को सुखमय एवं आनंद मय बनाना चाहिए। भजन के द्वारा माहौल को भागवत मय एवं भक्ति मय बना दिया। कथा आरंभ होने से पूर्व कथा व्यास का स्वागत कर तथा माला पहनाकर व्यास गद्दी पर बैठाया। कथा सुनने के लिए आस पास के लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।