बहराइच। नेपाल सीमा से सटे रूपईडीहा थाना क्षेत्र में भारी मात्रा में कोडीन युक्त सिरप की बरामदगी के बाद डीआईजी अशोक शुक्ला ने बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से बातचीत में डीआईजी ने साफ कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं का मिलना किसी भी तरह से “गुड वर्क” नहीं माना जा सकता, बल्कि यह सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक का संकेत है।
उन्होंने कहा कि असली गुड वर्क तब होता जब इतनी बड़ी मात्रा में कोडीन सिरप सीमा क्षेत्र तक पहुंचती ही नहीं। डीआईजी ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक को एक सप्ताह के भीतर ठोस और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच आंख मूंदकर नहीं बल्कि पूरी पारदर्शिता और सतर्कता के साथ की जाए।
डीआईजी ने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले के बाद सीमावर्ती थानों पर तैनात अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।read more:https://pahaltoday.com/the-ceasefire-will-have-global-implications-for-energy-the-economy-and-diplomacy-which-will-be-a-relief-for-the-general-public/सूत्रों के मुताबिक, बॉर्डर थानों में आमतौर पर छह माह में थाना अध्यक्षों का तबादला किया जाता है, ताकि तस्करों से संभावित साठ-गांठ को रोका जा सके। बावजूद इसके, कुछ थाना अध्यक्ष लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है।फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर पुलिस महकमे में हलचल तेज है और आने वाले दिनों में बड़े एक्शन की संभावना जताई जा रही है।