Varanasi: 110 साल पुरानी विश्वविद्यालय न केवल अपने प्रशासनिक नियमों और कार्यों के साथ अपनी प्रतिष्ठा पूरे देश विश्व में फैलता रहा वही यहां से पढ़े हुए छात्र-छात्राएं देश और विश्व के फलक पर अपना नाम रोशन करते रहे हैं। परंतु हाल के कुछ वर्षों में ऐसी नियुक्तियों को लेकर के सवाल उठाते रहे जिसमें भाई भतीजा बात और भ्रष्टाचार कर नियम बदलने के कार्य खूब जमकर प्रकाश में आते रहे हैं। विश्वविद्यालय में बैठे कुछ कुछ पदाधिकारी जिम शिक्षा जगत से भी जुड़े हुए लोग शामिल रहे उन्होंने अपने हित के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को धूल करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। मालवीय जी का नाम लेकर के दिखावे के लिए उनके आदर्शों पर चलने की बात करने वाले यहां अब कई तरह के शिक्षक अधिकारी मिल जाएंगे परंतु भ्रष्टाचार करने में संकोच जरा सा भी नहीं है। हाल के 25-30 सालों में काशी हिंदू विश्वविद्यालय को केंद्र सरकारों ने काफी धन दिया जिसका दुरुपयोग अब जमकर के यहां के उच्च पदों पर बैठे लोग जाम के कर रहे हैं। खरीदारी हो या नियुक्तियां हो उनमें वह अपने नियम को चलकर विश्वविद्यालय को भ्रष्टाचार की आग में झोंक देते हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस जिसमें कई विभाग हैं और उसमें कई पदों का सृजन होता रहा इन विभागों के अंतर्गत शिक्षक के अलावा जूनियर व सीनियर रेजिडेंट का भी एक निर्धारित समय के अंतर्गत कार्य करने का प्रावधान नेशनल मेडिकल काउंसिल के माध्यम से रहता है। एक वाक्य प्रकाश में आया है जिसका मसाला अब हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है उसमें उसे नियुक्ति को चुनौती दी गई है जिसका कोई विभाग नहीं है नहीं शिक्षक है.read more:https://pahaltoday.com/retired-teachers-and-shikshamitras-honored-at-baragaon-brc/यह ज्ञात हुआ है कि अपने हित के लिए तत्कालीन पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर सुधीर जैन जिन्होंने अपना पूरा कार्यकाल विश्वविद्यालय की नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बगैर एग्जीक्यूटिव काउंसिल के बिताया था उनकी इस गतिविधि में कई उच्च पदाधिकारी ने जमकर फायदा उठाकर विश्वविद्यालय को भ्रष्टाचार की आग में झोंक दिया। हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन नमक एक पद ट्रॉमा सेंटर में सृजित किया गया जिसकी कहीं से भी विभाग के बगैर सृजन कर दिया गया और और अपनी सहूलियत के अनुसार मनमानी तरीके से जो हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर की क्वालिफिकेशन होती है उसको भी छेड़छाड़ कर सामान्य दर्जे के विद्यार्थियों सीनियर रेजिडेंट के पद पर एमबीबीएस की जगह बीडीएस पास किए हुए छात्रों को लेकर के नेशनल मेडिकल काउंसिल और एम्स के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 2023 में ट्रॉमा सेंटर में नियुक्ति कर दी। परंतु हॉस्पिटल प्रशासक का जो कार्य है उससे इतर जाकर ट्रॉमा केंद्र प्रभारी ने उन्हें परचेज और ऑफिस के अंदर बैठा दिया जिनका काम उनकी जी हुजूरी करना और उनके बताए हुए कार्यों को केवल करना रहा। यह बात तब पकड़ में आई जब हाल ही में 2026 में एक अन्य विज्ञापन निकाला जो की इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस का ही था जिसमें सेंटर फॉर एजिंग के लिए हॉस्पिटल प्रशासक की नियुक्ति हेतु न्यूनतम एलिजिबिलिटी एमबीबीएस और एचडी मांगी गई। यह दोनों ही नियुक्तियां काशी हिंदू विश्वविद्यालय के रिक्रूटमेंट एंड एसेसमेंट सेल के निगरानी में निकली थी और दोनों ही बार नेशनल मेडिकल काउंसिल और एम्स की एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को बिना विभाग के निकाल दी गई। जब बिना विभाग के यह नियुक्ति की जा रही हैं और वह भी भिन्न-भिन्न एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के साथ उसमें प्रश्न होना संभावित था। केंद्रीय विश्वविद्यालय काशी हिंदू विश्वविद्यालय में स्थित इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस हाल के दिनों में काफी चर्चा में रहा जिसमें ट्रॉमा सेंटर के प्रशासक की कार्यशैली सबसे अधिक चर्चा में रही जिनके ऊपर आए दिन कई तरह के आरोप लगाते रहे और विश्वविद्यालय के कई तरह के नियमों को उन्होंने अपने कार्यकाल में अब तक मनमानी तरीके से नियम में बदलाव करवा करवा के जो कि विश्वविद्यालय के मानक से भिन्न होकर के भी बदलवा दिया। वहीं पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर सुधीर जैन से भरपूर लाभ उठाकर कई नियमों को छेड़छाड़ कर एक अवैधानिक पद जिसका उल्लेख काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कानून में कहीं नहीं है वहां पर 5 वर्षों से काबिज है इसे लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन की किरकिरी कई बार हो चुकी है.