ललितपुर- जिला क्षयरोग नियंत्रण केन्द्र में राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य टीबी मरीजों को कुपोषण से बचाना और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करना था।इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इम्तियाज अहमद एवं पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. सौरभ सक्सेना के द्वारा क्षयरोगियों को पोषण पोटली का वितरण किया गया। इस आयोजन का सबसे प्रमुख संदेश यह था कि टीबी एक पूर्णतः इलाज योग्य बीमारी है, बशर्ते मरीज नियमित रूप से दवाओं का सेवन करे और उचित आहार में ग्रहण करे। इसके साथ ही, समाज के हर वर्ग से निक्षय मित्र बनकर मरीजों को गोद लेने और उनके पोषण की जिम्मेदारी उठाने का विशेष आग्रह किया गया, ताकि मरीज जल्द से जल्द स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट सकें। यह पहल केवल मरीर्जा को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समय चिकित्सा दृष्टिकोण को दर्शाती है जहाँ दवा के साथ-साथ आहार को भी उपचार का एक अनिवार्य हिस्सा माना गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इम्तियाज अहमद ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि इस पूरी कवायद का प्राथमिक उद्द्देश्य मरीजों के पोषण स्तर को निरंतर बेहतर बनाकर उनके शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाना है। जब शरीर को पर्याप्त और सही पोषण मिलता है, तो वह टीबी के बैक्टीरिया से अधिक मजबूती से लड़ने में सक्षम होता है।read more:https://pahaltoday.com/barabanki-festival-will-be-inaugurated-from-april-10/क्षयरोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और उन्हें सामाजिक संबल प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘मरीजों को गोद लेने की योजना’ (निक्षय मित्र अभियान) का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. सौरभ सक्सेना ने इस योजना के सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को गोद लेने के लिए आमजन को निरंतर प्रेरित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत कोई भी सामान्य नागरिक, सरकारी या गैर-सरकारी अधिकारी, समाजसेवी संगठन, और कॉर्पोरेट संस्थाएं निक्षय मित्र बनकर मरीजों की सहायता कर सकती हैं। डॉ. सौरभ सक्सेना ने जोर देकर कहा कि निक्षय मित्र बनकर आम जनता इन मरीजों के साथ सच्ची मित्रता निभा सकती है। टीबी के इलाज में पोषण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बीमारी शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है और तेजी से वजन कम करती है। जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. राम नरेश सोनी ने इस अवसर पर आम जनता और मरीजों के बीच व्याप्त भांतियों को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक पूर्णतः इलाज योग्य बीमारी है। हालांकि, इस इलाज की सफलता दो प्रमुख शर्तों पर निर्भर करती है-मरीज का बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से अपनी दवाएं लेना और शारीरिक आवश्यकता के अनुसार उचित पोषण प्राप्त करना। उन्होंने बताया कि कुपोषण और टीबी का एक दुष्चक्र होता हैः कुपोषण से टीवी होने का खतरा बढ़ता है और टीबी होने से व्यक्ति कुपोषित हो जाता है। इसलिए, पोषण पोटली जैसी पहल मरीजों के समग्र इलाज को बेहतर बनाने में एक निर्णायक और अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ राम नरेश सोनी, चिकित्सा अधिकारी डॉ जे एस बक्शी एवं जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र ललितपुर के अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।