भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण क्या? पासपोर्ट पर उठे सवालों के बीच स्पष्ट नीति की उठी मांग

गाजीपुर। हाल ही में सामने आई उस जानकारी के बाद, जिसमें विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट भारत की नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं बल्कि विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता के प्रमाण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इसी मुद्दे पर समाजवादी महिला सभा उत्तर प्रदेश की प्रदेश सचिव एवं सदर विधानसभा गाजीपुर की प्रभारी पुनीता सिंह ने सरकार से नागरिकता संबंधी स्पष्ट और सर्वमान्य व्यवस्था लागू करने की मांग की है।read more:https://pahaltoday.com/mandal-president-celebrated-the-foundation-day-of-bjp/पुनीता सिंह ने कहा कि वर्तमान में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड सहित कई सरकारी दस्तावेज नागरिकों के पास उपलब्ध हैं, लेकिन प्रत्येक दस्तावेज का उपयोग अलग-अलग उद्देश्यों तक सीमित है। ऐसे में यदि किसी नागरिक की पहचान या नागरिकता पर सवाल उठता है तो उसके समक्ष असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में फर्जी दस्तावेज तैयार करने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। इसलिए देश की आंतरिक सुरक्षा, सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय पहचान प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।उन्होंने सुझाव दिया कि आधार प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं पारदर्शी बनाया जाए तथा एक ऐसी एकीकृत डिजिटल पहचान व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें आधार के साथ सत्यापित मोबाइल नंबर, पैन कार्ड, बैंक खाता, ईमेल, स्थायी एवं वर्तमान पता तथा अन्य आवश्यक जानकारियां सुरक्षित रूप से दर्ज हों। साथ ही नागरिकों की निजता और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।पुनीता सिंह ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास होना चाहिए कि उसकी नागरिकता किसी भ्रम या विवाद का विषय नहीं बन सकती। उन्होंने सरकार और नीति-निर्माताओं से इस दिशा में स्पष्ट एवं व्यापक नीति बनाने की मांग करते हुए कहा कि ऐसी सर्वमान्य पहचान व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिस पर सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन और देश का प्रत्येक नागरिक समान रूप से भरोसा कर सके।

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