आपातकाल लोकतंत्र नहीं, इंदिरा गांधी की सत्ता बचाने का फैसला था : रामबहादुर राय

पहल टुडे, अंशु कुमार
नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अजय सेतिया की आपातकाल पर आधारित नई पुस्तक का विमोचन वरिष्ठ चिंतक गोविंदाचार्य, डॉ. राजकुमार भाटिया, अर्जनीत अवस्थी और वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने किया। कार्यक्रम में आपातकाल के दौर के कई साक्षी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। इस अवसर पर आपातकाल के दौरान जेल जा चुके वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल देश की आंतरिक सुरक्षा के कारण नहीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की संसदीय सदस्यता बचाने के लिए लगाया गया था।
राय ने कहा कि जिस आधार पर आपातकाल लगाने की बात कही गई थी, उस समय वैसी परिस्थितियाँ देश में मौजूद नहीं थीं। उनके अनुसार रेल कर्मचारियों का आंदोलन काफी हद तक शांत हो चुका था और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहा बिहार आंदोलन भी उस स्तर पर नहीं था कि देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा बताया जा सके। राय ने कहा कि वास्तविक कारण इलाहाबाद उच्च न्यायालय का वह फैसला था, जिसमें इंदिरा गांधी का चुनाव निरस्त कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी संसदीय सदस्यता बचाने और सर्वोच्च न्यायालय में राहत मिलने तक सत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से देश पर आपातकाल थोपा गया।
इस अवसर पर श्री राम बहादुर राय और अजय सेतिया ने कहा कि यह बात पूरी तरह गलत है कि इंदिरा गांधी ने 25 जून को जयप्रकाश नारायण के भाषण में सेना और पुलिस को सरकार के आदेश न मानने की अपील के कारण आपातकाल लगाया था। उनका कहना था कि आपातकाल की तैयारी छह महीने से चल रही थी। उन्होंने कहा कि आपातकाल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के उनके खिलाफ आए फैसलों के कारण लगाया गया था, क्योंकि इंदिरा गांधी इस्तीफा नहीं देना चाहती थीं। सिद्धार्थ शंकर रे ने शाह आयोग के सामने स्वीकार किया था कि आपातकाल का निर्णय एक दिन पहले ही हो चुका था। सुबह राष्ट्रपति भवन जाते समय इंदिरा गांधी ने सिद्धार्थ शंकर रे से पूछा कि यदि राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की मंजूरी का प्रश्न उठाएँगे तो क्या उत्तर दिया जाएगा। इस पर सिद्धार्थ शंकर रे ने कुछ और समय लेकर कानूनी पहलुओं पर विचार करने की सलाह दी। बाद में कार्य संचालन नियम 12 का हवाला देते हुए राष्ट्रपति को यह आश्वासन दिया गया कि मंत्रिमंडल से बाद में मंजूरी ले ली जाएगी। इसके बाद आपातकाल लगाने का कारण जयप्रकाश नारायण के भाषण को बताया गया।
पुस्तक में नए तथ्य और ऐतिहासिक संदर्भ
पुस्तक के लेखक अजय सेतिया ने कहा कि आपातकाल के खिलाफ संघर्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और छात्र संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि आपातकाल पर पहले भी अनेक पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं, लेकिन उनकी पुस्तक में कई ऐसे नए तथ्य और ऐतिहासिक संदर्भ शामिल हैं जो अब तक व्यापक रूप से सामने नहीं आए हैं और जिनकी जानकारी पुस्तक पढ़ने पर ही मिलेगी।
अजय सेतिया ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि इस पुस्तक की प्रस्तावना राम बहादुर राय ने लिखी है। यह उनके लिए सम्मान और गर्व की बात है, क्योंकि वे स्वयं आपातकाल की पीड़ा के साक्षी रहे हैं और उस ऐतिहासिक संघर्ष के प्रत्यक्ष गवाह भी हैं।

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