बलिया/आजमगढ़।बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बलिया जनपद के गरवार ब्लॉक स्थित पुरानी मछली बाजार पोखर के पास सामने आया ट्रांसफार्मर विवाद अब केवल एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार, विभागीय लापरवाही और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला बनता जा रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर लगा ट्रांसफार्मर 100 KVA का है, जबकि विभागीय अभिलेखों में उसी स्थान पर 250 KVA ट्रांसफार्मर दर्ज दिखाया गया है। यदि यह आरोप सही है तो सवाल केवल 150 KVA की क्षमता का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जिसके भरोसे लाखों उपभोक्ताओं को बिजली देने का दावा किया जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र का विद्युत भार लगातार बढ़ रहा था। इसके बावजूद कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त लोड डाला गया। नतीजा यह हुआ कि दो दिन पहले ट्रांसफार्मर तेज धमाके के साथ फुंक गया और पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया।सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विभागीय रिकॉर्ड में 250 KVA ट्रांसफार्मर दर्ज था तो मौके पर 100 KVA का ट्रांसफार्मर किसके आदेश पर लगाया गया? यदि 250 KVA ट्रांसफार्मर की खरीद, स्वीकृति और स्थापना कागजों में दिखाई गई है तो शेष क्षमता आखिर कहां गई? क्या सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ? क्या किसी स्तर पर रिकॉर्ड और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर छिपाया गया?यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब आजमगढ़ के मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र के उपभोक्ता भी लंबे समय से बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/co-gave-instructions-for-action-against-anarchists-and-drug-addicts/ मंगरावा, मखदुमपुर, वजीरमलपुर, खालिसपुर, कोइलाडीह, मुजफ्फरपुर, बिंद्रा बाजार, रानीपुर रजमों, दयालपुर, मोहम्मदपुर, फरिहा और अबूसैदपुर सहित दर्जनों गांवों में लोग लगातार कटौती, लो वोल्टेज, जर्जर तारों और ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की शिकायत करते रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जब भी ट्रांसफार्मर फुंकता है या फीडर ट्रिप होता है, सबसे पहले जनता को परेशानी झेलनी पड़ती है। लेकिन शायद ही कभी यह जांच होती है कि आखिर बार बार उपकरण खराब क्यों हो रहे हैं। क्या क्षमता के अनुसार उपकरण लगाए गए हैं? क्या रखरखाव सही तरीके से हो रहा है? क्या विभागीय रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत एक जैसी है?बिजली विभाग अक्सर तकनीकी खराबी और ओवरलोड का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलता है, लेकिन बलिया का यह मामला एक बड़ा प्रश्न छोड़ गया है। यदि रिकॉर्ड और वास्तविकता में इतना बड़ा अंतर पाया जाता है तो यह केवल प्रशासनिक भूल नहीं मानी जा सकती।भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट झेल रही जनता अब जवाब मांग रही है। लोगों का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिल कुछ दिन लेट हो जाए तो तत्काल नोटिस और कार्रवाई शुरू हो जाती है, लेकिन जब विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं तो जांच की गति बेहद धीमी क्यों हो जाती है?क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए। मौके पर स्थापित ट्रांसफार्मर की क्षमता का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए। विभागीय रिकॉर्ड की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।क्योंकि सवाल सिर्फ एक ट्रांसफार्मर का नहीं है।सवाल यह है कि क्या बिजली व्यवस्था जनता की सुविधा के लिए चलाई जा रही है या फिर कागजों में विकास दिखाकर वास्तविक समस्याओं को छिपाया जा रहा है?