अनिकेत सिंह
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद से विदेशियों के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। ट्रम्प सरकार, उनका राजनीतिक दल और उनके नेता भारतीयों सहित एशियाई लोगों के खिलाफ नफरत का वातावरण बना रहे हैं, जिसका परिणाम अब हत्याओं तक पहुंच चुका है।0 पिछले पांच महीनों में हुई प्रमुख घटनाएं अभी दो सप्ताह पहले ही अमेरिका के फिलाडेल्फिया में भारतीय मूल के युवक अंशुल कुंचा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अंशुल आधी रात को पिज्जा डिलीवर करने पहुंचा था, तभी उसकी हत्या कर दी गई। जिस घर में पिज्जा डिलीवरी का आर्डर था, वह मकान खाली पड़ा था। मृतक के परिवार का आरोप है कि अंशुल की सुनियोजित साजिश के तहत हत्या की गई। वह पांच वर्ष पहले नौकरी के लिए अमेरिका गया था। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत था, लेकिन अतिरिक्त आय के लिए पिज्जा डिलीवरी का काम भी करता था। कैलिफोर्निया में 22 वर्षीय साकेत श्रीनिवास पिछले फरवरी में विश्वविद्यालय परिसर के पास देखा गया था। बाद में एक इमारत के पास उसका बैग, लैपटॉप और पासपोर्ट मिला। पुलिस जांच में उसका शव कैंपस के निकट एक तालाब से बरामद हुआ। मार्च महीने में टेक्सास में पढ़ रही भारतीय छात्रा सविता शान की हत्या कर दी गई। ऑस्टिन क्षेत्र के एक लोकप्रिय बार के पास अंधाधुंध गोलीबारी में सविता सहित दो अन्य युवकों की भी मृत्यु हुई। गोलीबारी करने वाला अपराधी बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
इससे पहले नॉर्थ कैरोलिना में रहने वाले युवा मैनेक पटेल की उसके स्टोर में लूटपाट करने आए एक किशोर ने हत्या कर दी थी। उसकी पत्नी अमी सात महीने की गर्भवती थी और उनकी पांच वर्ष की एक बेटी भी है। हाल ही में अमेरिका में हिंदू समुदाय के विरुद्ध बढ़ते घृणा अपराधों के विरोध में लाए गए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को 32 कांग्रेस सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ है। भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव में अमेरिकी अर्थव्यवस्था, समाज, विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य क्षेत्रों में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के योगदान को स्वीकार किया गया है। साथ ही हिंदूफोबिया, हिंदू-विरोधी कट्टरता और हिंदू पूजा स्थलों पर होने वाले हमलों की निंदा भी की गई है। हाल ही में एक भारतीय दंपति के साथ दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक अमेरिकी व्यक्ति उन्हें अपशब्द कहता हुआ और अमेरिका छोड़कर चले जाने को कहता हुआ दिखाई देता है। अमेरिका में पिछले कुछ समय से भारतीय नागरिकों पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। भारतीयों की अत्यंत क्रूर तरीकों से हत्या की जा रही है। हाल ही में 50 वर्षीय चंद्रमौली नागमल्लैया की एक व्यक्ति ने गला काटकर हत्या कर दी। इतना ही नहीं, परिवार के सामने ही उसके सिर को फुटबाल की तरह लात मारकर उछाला गया। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ हेट एंड एक्स्ट्रीमिज़्म (CSHE) द्वारा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन बर्नार्डिनो में संकलित आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष पहले की तुलना में एशियाई लोगों के विरुद्ध घृणा अपराधों में 339 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विशेष रूप से सैन फ्रांसिस्को, न्यूयार्क और लॉस एंजिल्स जैसे शहरों में एशियाई-अमेरिकियों के विरुद्ध नफरत तेजी से बढ़ रही है। एशियाई-अमेरिकियों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मुहिम चलाने वाले संगठन ‘मेक अस विजिबल’ के संस्थापक केनी इलंगोवन ने एक अंग्रेजी पत्रिका को बताया कि एशियाई-अमेरिकियों के खिलाफ अपराधों में वास्तव में भारी वृद्धि हुई है।read more:https://pahaltoday.com/the-strait-of-hormuz-will-not-be-opened-by-agreement-alone-removing-marine-mines-will-take-time/महामारी के दौरान न्यू जर्सी में हेट क्राइम में लगभग 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। एशियन अमेरिकन एंड पैसिफिक आइलैंडर समुदाय के विरुद्ध घृणा अपराधों का रिकार्ड रखने वाली संस्था के अनुसार, हर तीन में से एक AAPI माता-पिता का कहना है कि उनके बच्चों को पिछले वर्ष घृणा की घटनाओं का सामना करना पड़ा।।इन घटनाओं में सबसे बड़ा मामला 16 मार्च, 2021 को अटलांटा में हुआ था, जब एक बंदूकधारी ने आठ लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मृतकों में छह एशियाई महिलाएं थीं। एक जानकारी के अनुसार, विदेशों की 41 विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत 633 भारतीय छात्र पिछले पांच वर्षों में विभिन्न कारणों से मृत्यु का शिकार हुए हैं। इनमें प्राकृतिक मृत्यु, दुर्घटना और चिकित्सा कारण भी शामिल हैं।।कनाडा – 172 छात्र, अमेरिका – 108 छात्र,।यूनाइटेड किंगडम – 58 छात्र, ऑस्ट्रेलिया – 57 छात्र, रूस – 37 छात्र, जर्मनी – 24 छात्र, यूक्रेन – 18 छात्र, जॉर्जिया, किर्गिस्तान और साइप्रस – 12-12 छात्र, चीन – 8 छात्र। वर्ष 2020 में कोलोराडो के लेकवुड में अपने स्टोर में काम कर रहे लखवंत सिंह पर एक ग्राहक ने नस्लीय घृणा से प्रेरित हमला किया था। आरोपी एरिक ब्रीमैन ने स्टोर में तोड़फोड़ की और लखवंत सिंह तथा उनकी पत्नी से कहा कि वे अपने देश वापस चले जाएं। जब लखवंत सिंह उसकी गाड़ी की नंबर प्लेट का फोटो लेने बाहर निकले, तो ब्रीमैन ने अपनी कार से उन्हें टक्कर मारकर पार्किंग क्षेत्र से बाहर फेंक दिया। मार्च, 2020 में चाइनीज फार अफर्मेटिव एक्शन और सैन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के एशियन अमेरिकन स्टडीज़ विभाग ने मिलकर “स्टॉप AAPI हेट रिपोर्टिंग सेंटर” शुरू किया। इसके केवल एक सप्ताह में ही 600 हेट क्राइम की शिकायतें प्राप्त हुईं। एक महीने में यह संख्या 1,500 तक पहुंच गई। दो वर्षों बाद जारी रिपोर्ट में 11,500 घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट के अनुसार यह तो केवल समस्या का एक छोटा हिस्सा है। राष्ट्रीय स्तर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2024-25 में हर पांच में से दो एशियाई-अमेरिकी और प्रशांत द्वीपवासी नागरिकों ने गंभीर घृणा और भेदभाव का अनुभव किया है। महिलाओं और बच्चों को सबसे आसान निशाना बनाया गया। 24 अगस्त को डलास में एस्मेराल्डा अप्टन नामक मैक्सिकन-अमेरिकी महिला ने चार भारतीय महिलाओं पर नस्लीय हमला करते हुए उन्हें भद्दी गालियां दीं और कहा कि वह उनसे नफरत करती है तथा उन्हें अपने देश वापस चले जाना चाहिए।
रितु चंद्रा बताती हैं कि उन्होंने भी नस्लीय भेदभाव का सामना किया है। वे एक अपार्टमेंट खरीदने गई थीं, जहां उन्हें बताया गया कि वह बिक चुका है। बाद में जब उनकी एक श्वेत मित्र ने उसी अपार्टमेंट के बारे में पूछा तो पता चला कि वह अभी उपलब्ध था। रितु का कहना है कि केवल इसलिए उन्हें वह अपार्टमेंट नहीं दिया गया क्योंकि वे गोरी नहीं थीं। उनका कहना है कि डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद लोगों को ऐसा लगने लगा कि उन्हें नस्लीय हमले करने का खुला अधिकार मिल गया है। पिछले वर्ष अमेरिका की एफबीआई की सैक्रामेंटो फील्ड ऑफिस ने भारत से पारिवारिक या व्यावसायिक संबंध रखने वाले लोगों को निशाना बनाने वाले एक बड़े उगाही (Extortion) रैकेट के बारे में चेतावनी जारी की थी। भारतीय मूल के उद्योगपतियों, होटल मालिकों और अन्य प्रभावशाली लोगों से धन उगाही की जा रही थी। धमकी दी जाती थी कि पैसे न देने पर जान से मार दिया जाएगा। कई स्थानों पर गोलीबारी की घटनाएं भी हुईं। एफबीआई ने हेल्पलाइन जारी कर भारतीय मूल के सभी लोगों से ऐसे मामलों की सूचना पुलिस को देने की अपील की थी। हालांकि प्रश्न यह है कि क्या केवल आंकड़े इकट्ठा करने से एशियाई-अमेरिकियों को मानसिक रूप से तोड़ देने वाली इस समस्या का अंत हो जाएगा? एक हिंदू संगठन के नेता का उत्तर है, नहीं, हम इसके खिलाफ संघर्ष करेंगे। उनके अनुसार सैकड़ों लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं। वे घृणा अपराधों के विरुद्ध कठोर कानून और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से पिछले वर्ष जनवरी में ‘मेक अस विजिबल एनजे’ संगठन की स्थापना की गई। दो अभिभावकों और एक शिक्षक द्वारा शुरू किए गए इस संगठन से अब अनेक लोग जुड़ चुके हैं। संगठन से जुड़े केनी इलंगोवन कहते हैं: “मेरा जन्म यहीं हुआ है। यही मेरा देश है। यह दुखद है कि कई लोग यहां पांच-पांच पीढ़ियों से रह रहे हैं, फिर भी केवल उनके रंग-रूप के कारण उनके साथ विदेशियों जैसा व्यवहार किया जाता है। मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चे यहां सुरक्षित महसूस करें। यही उनका घर है।” पिछले तीन वर्षों में न्यू जर्सी में एशियाई-अमेरिकियों के प्रति बढ़ती नफरत का एक कारण वहां की बदलती जनसंख्या संरचना भी माना जा रहा है। नवीनतम जनगणना के अनुसार राज्य की लगभग 11 प्रतिशत आबादी एशियाई-अमेरिकी है, जबकि जर्सी सिटी में यह अनुपात 28 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सिमा कुमार, जो ‘मेक अस विजिबल एनजे’ से जुड़ी शिक्षिका हैं, कहती हैं कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव आवश्यक है ताकि विद्यार्थियों को समाज की बदलती विविधता और विभिन्न समुदायों के योगदान के बारे में सही जानकारी मिल सके तथा भविष्य की पीढ़ियां घृणा अपराधों के विरुद्ध प्रभावी ढंग से संघर्ष कर सकें।