मोहर्रम की पांचवीं रात जमानियां में निकला पारंपरिक अखाड़ा जुलूस, ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंजा नगर

गाजीपुर जमानियां । मोहर्रम के पवित्र महीने की पांचवीं तारीख पर शनिवार देर रात जमानियां कस्बा क्षेत्र में पारंपरिक अखाड़ा जुलूस श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ निकाला गया। रात लगभग 10 बजे शुरू हुआ यह जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए नगर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचा, जहां अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
जुलूस में शामिल युवा अखाड़ा दलों ने लाठी, तलवार एवं अन्य पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन करते हुए आकर्षक करतब दिखाए। पूरे मार्ग पर “या हुसैन”, “या अली-या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और कर्बला के शहीदों को याद कर दुआएं कीं।read more:https://pahaltoday.com/the-essence-of-prasad-is-to-receive-the-blessings-of-the-deity-to-whom-it-is-offered/अखाड़ा जुलूस के खलीफा निशात खान वारसी ने कहा कि यह परंपरा पिछले 50-60 वर्षों से निरंतर चली आ रही है और कभी किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न नहीं हुआ। उन्होंने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सभी को आपसी सौहार्द, भाईचारे और सामाजिक एकता को बनाए रखते हुए इस विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कानून-व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में पुलिस प्रशासन की भूमिका की सराहना भी की।निशात खान ने बताया कि मोहर्रम के दौरान पहली, तीसरी और पांचवीं तारीख को अखाड़ा जुलूस निकाला जाता है। इसके अलावा छठी तारीख को दुलदुल का जुलूस, सातवीं को अलम-सद्दा तथा नौवीं मोहर्रम को ताजियों का भ्रमण कराया जाता है। दसवीं मोहर्रम को सभी ताजिए एक साथ कर्बला दूरहिया पहुंचते हैं, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाता है। यह प्रक्रिया देर रात तक चलती रहती है।इस अवसर पर मोहम्मद आरिफ खान वारसी ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत इंसानियत, सत्य और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने, मानवता के मूल्यों को अपनाने तथा जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश आज भी समाज को एकता, त्याग और इंसाफ की राह दिखाता है।कार्यक्रम में शाही जामा मस्जिद के सचिव मौलाना तनवीर रजा, अमन-शांति एवं एकता कमेटी के सरपरस्त नेसार खान वारसी, असलम पान वाले, मोहम्मद अकील अजहर, नेहाल खान, सैयद फैजान, मोहम्मद सैयर खान वारसी, दानिश मंसूरी, शाहिद जमाल मंसूरी, अफजाल मंसूरी, जाहिद मंसूरी, बेलाल मंसूरी, कमाल मंसूरी, जमाल मंसूरी, अरशद मंसूरी, फैय्याज मंसूरी, मेराज मंसूरी, रुस्तम अली, ताबिश मंसूरी, आदिल, मोहम्मद असलम मंसूरी, मेराज हसन, हाजी एडवोकेट इमरान नियाजी सहित हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग उपस्थित रहे।मोहर्रम की पांचवीं रात निकले इस पारंपरिक अखाड़ा जुलूस ने नगर में धार्मिक आस्था, अनुशासन और गंगा-जमुनी तहजीब की सुंदर मिसाल पेश की।

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