बहराइच ( कैसरगंज )lभारतीय लोकतंत्र के इतिहास में वर्ष 1975 से 1977 के बीच लगाया गया आपातकाल एक ऐसा अध्याय माना जाता है, जिसे आज भी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर सबसे बड़े संकट के रूप में याद किया जाता है। उस दौर में हजारों लोकतंत्र प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया, जेल की यातनाएं सही और अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की। इन्हीं लोकतंत्र सेनानियों में कैसरगंज क्षेत्र के ग्राम नौगैया निवासी क्रांति कुमार सिंह का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है।क्रांति कुमार सिंह ने आपातकाल के दौरान सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए लोकतंत्र की बहाली के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उस समय विरोध की आवाज उठाना आसान नहीं था। सरकार के विरोध में बोलने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद क्रांतिक कुमार सिंह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे।लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष का परिणाम यह हुआ कि उन्हें करीब 22 महीने तक जेल में रहना पड़ा। जेल में रहते हुए उन्होंने अनेक कठिनाइयों और यातनाओं का सामना किया, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कभी कमजोर नहीं पड़ी। उनके साथ देशभर के हजारों लोकतंत्र सेनानियों ने भी जेल की सजा भुगती और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।देश ने बदली कई सरकारें, लेकिन सम्मान अब भी अधूराआपातकाल समाप्त होने के बाद देश में कई राजनीतिक परिवर्तन हुए। विभिन्न दलों की सरकारें सत्ता में आईं और गईं, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले अनेक सेनानियों को वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसके वे वास्तविक हकदार थे। क्रांति कुमार सिंह भी उन्हीं लोकतंत्र रक्षक सेनानियों में शामिल हैं, जो आज भी उचित सम्मान और पहचान की अपेक्षा रखते हैं।read more:https://pahaltoday.com/prerna-yatra-organized-on-mangal-pandey-martyrdom-day-and-bankim-chandra-chattopadhyays-death-anniversary/समाजवादी पार्टी की सरकार ने लोकतंत्र रक्षक सेनानियों के लिए पेंशन योजना लागू की थी, जिसका लाभ उन्हें वर्तमान में मिल रहा है। हालांकि क्षेत्र के लोगों का मानना है कि केवल पेंशन देना ही पर्याप्त नहीं है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले सेनानियों को सरकारी स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए तथा उनके योगदान को इतिहास के पन्नों में प्रमुख स्थान मिलना चाहिए।नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं क्रांति कुमार सिंहआज जब देश की युवा पीढ़ी लोकतंत्र और संविधान की बात करती है, तब क्रांतिक कुमार सिंह जैसे सेनानियों का संघर्ष एक प्रेरणास्रोत बनकर सामने आता है। उन्होंने व्यक्तिगत लाभ की चिंता किए बिना लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया और जेल की कठिन परिस्थितियों को सहन किया। ऐसे लोगों की बदौलत ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनी रही।क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि लोकतंत्र रक्षक सेनानियों की जीवनी और संघर्ष को विद्यालयों एवं सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को यह जानकारी मिल सके कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए कितने लोगों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय जेलों में बिताया था।सम्मान की मांग हुई तेजकैसरगंज क्षेत्र के लोगों ने सरकार से मांग की है कि ग्राम नौगैया निवासी लोकतंत्र रक्षक सेनानी क्रांति कुमार सिंह को उनके संघर्ष और योगदान के अनुरूप सम्मान प्रदान किया जाए। साथ ही लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी सेनानियों को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर विशेष पहचान और सम्मान दिया जाए, जिससे उनका त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।आज भी नौगैया की धरती पर रह रहे क्रांति कुमार सिंह आपातकाल के उस संघर्षपूर्ण दौर की जीवंत मिसाल हैं, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने जीवन के 22 महत्वपूर्ण महीने जेल की सलाखों के पीछे बिताए। उनका संघर्ष भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सदैव याद किया जाएगा।