गाजीपुर । प्राकृतिक खेती कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह भारतीय ऋषि परंपरा और कृषि संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। समय की मांग है कि इस पारंपरिक कृषि पद्धति को पुनर्जीवित कर स्वस्थ समाज और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में कदम बढ़ाया जाए। यह बातें भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश राय ने कृषि विभाग द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहीं।read more:https://pahaltoday.com/consumers-booked-for-gas-refill-booking/उन्होंने कहा कि लगभग पांच दशक पहले किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया जाता था, लेकिन अब वही व्यवस्था लोगों को स्वस्थ जीवन के लिए रासायनिक खेती से दूरी बनाने और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दे रही है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी भूमि की उर्वरता और परिवार की सेहत दोनों को सुरक्षित करें।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर पालिका परिषद गाजीपुर की अध्यक्ष सरिता अग्रवाल ने कहा कि प्रारंभिक वर्षों में प्राकृतिक खेती अपनाने पर किसानों को उत्पादन कम होने की आशंका रहती है, लेकिन लगातार तीन से चार वर्षों तक इस पद्धति को अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और उत्पादन भी रासायनिक खेती के बराबर पहुंच जाता है। उन्होंने इसे किसानों के लिए दीर्घकालिक लाभ का माध्यम बताया।उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने किसानों, कृषि सखियों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत विकास भवन और विभिन्न विकास खंडों में संचालित प्रेरणा कैंटीनों से जुड़कर प्राकृतिक एवं श्री अन्न आधारित उत्पादों का विपणन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग को मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत मिलेट्स आउटलेट स्थापित करने के लिए 10 लाख रुपये तक के अनुदान का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके लिए इच्छुक व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं।कार्यशाला के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कॉलेज के वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और अग्नास्त्र जैसे प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों का लाइव प्रदर्शन कर किसानों को उनकी निर्माण एवं उपयोग विधि की जानकारी दी। किसानों ने प्रशिक्षण में विशेष रुचि दिखाई और विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं।कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अतिथियों ने श्री अन्न (मिलेट्स) से तैयार विभिन्न व्यंजनों का स्वाद चखा और उनकी सराहना की। लहुरी काशी वूमेन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की अध्यक्ष श्रीमती अंजू चतुर्वेदी द्वारा रागी से तैयार विशेष केक भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिसका सभी अतिथियों ने स्वागत किया।इस अवसर पर विभिन्न विभागों एवं किसान उत्पादक संगठनों द्वारा लगाए गए स्टालों पर प्राकृतिक उत्पादों, जैविक कृषि तकनीकों और श्री अन्न आधारित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। कार्यशाला ने किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।