सोनभद्र। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में चलाए जा रहे पेड़ है तो प्राण है अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी, वनवासी और किसान समुदाय ने जंगलों की कटाई तथा प्रस्तावित ऊर्जा परियोजनाओं के खिलाफ एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, वनाधिकार और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा को लेकर जोरदार आवाज उठाई गई।read more:https://pahaltoday.com/raja-singh-gave-five-tips-to-the-forest-dwellers-to-face-the-challenges/कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता संदीप मिश्रा ने कहा कि पेड़, पानी और पहाड़ किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि सबका है। प्रकृति केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है, जिसकी रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। मोर्चा के जिला संयोजक रामसूरत खरवार ने कहा कि जंगल आदिवासी और ग्रामीण समुदाय के जीवन, संस्कृति और अस्तित्व का आधार हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जान दे देंगे, लेकिन जंगल नहीं कटने देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जेएसडब्ल्यू, अबाडा, अडानी समेत विभिन्न निजी ऊर्जा परियोजनाओं के कारण बड़े पैमाने पर जंगल और ग्रामीणों की भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे पर्यावरण और स्थानीय जनजीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। वक्ताओं ने कहा कि विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने मांग की कि किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले प्रभावित ग्रामीणों की सहमति सुनिश्चित की जाए तथा पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाए। इस अवसर पर कार्यालय मंत्री कैलाश तिवारी को विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा गया। कार्यक्रम में रामसूरत खरवार, गुलाब चेरो, दिनेश गोंड, मुरहु गोंड, रामेश्वर पनिका, जीतू माझी, बिंदु खरवार, आकाश चैहान, सत्रुधन बिंद, सूरज कनौजिया, सुजीत विश्वकर्मा, विजय चैहान, सत्यम पाण्डेय, शंकर सोनी, संजय बियार, विजय बिंद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए जनजागरण अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाने का संकल्प लिया।