ललितपुर। बिरधा ब्लॉक मुख्यालय पर सकल दि. जैन समाज बिरधा (ब्लॉक) द्वारा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन खंड विकास अधिकारी बिरधा के माध्यम से सौंपकर विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने तथा आर्थिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई।read more:https://pahaltoday.com/raghav-chadha-becomes-chairman-of-parliaments-petition-committee/ज्ञापन में जैन समाज ने कहा कि हाल ही में विहाररत आर्थिका माताजी के साथ हुई दुखद घटना से समाज में गहरा दुख और चिंता का वातावरण है। समाज का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों एवं वीडियो क्लिपों के आधार पर यह मामला केवल सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं माना जा सकता, इसलिए इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है। ज्ञापन में बताया गया कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, निहत्थे एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधाओं का उपयोग नहीं करते तथा समाज में शांति, संयम और अहिंसा का संदेश देते हैं। ऐसे में उनके साथ बढ़ती दुर्घटनाएं एवं हमले समाज के लिए अत्यंत चिंता का विषय हैं। जैन समाज ने प्रमुख मांगों में इस प्रकरण की SIT अथवा न्यायिक जांच कराए जाने, घटना से संबंधित CCTV, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की। साथ ही यदि किसी प्रकार के षड्यंत्र के तथ्य सामने आते हैं तो कठोर धाराएं लगाने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने, विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक एवं हाईवे क्षेत्रों में विशेष सावधानी सुनिश्चित करने की मांग की गई। ज्ञापन में भारत सरकार से राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाए जाने की भी मांग की गई, जिसमें पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय गाइडलाइन, सुरक्षा SOP तथा संवेदनशील मार्गों के लिए विशेष प्रावधान लागू करने की बात कही गई। साथ ही संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखने की मांग भी की गई। समाज का कहना है कि साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते, वाहन या सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते तथा पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं। स्थानीय स्तर पर आपातकालीन संपर्क व्यवस्था विकसित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। जैन समाज ने कहा कि वह सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है तथा उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मौन जलूस को प्रमुख रूप से सफल बनाने में संयोजक संजय जैन मोदी, नरेंद्र जैन, अशोक मोदी, कैलाश चंद,अनिल जैन, रानू जैन ,अरविंद जैन,राजीव जैन, इंग्लिश जैन,सुबोध जैन, सुनील जैन,दिलीप जैन, अशोक जैन,अंतिम,शैलेश जैन,वैराग्य जैन, साहिल जैन,अंतिम जैन, संदेश जैन,सौरभ जैन, वैभव, अनुराग, प्रतीक सनी, समय, आयुष, नैतिक,आर्यन,मुकेश जैन, पीयूष जैन, सुबोध जैन, भगवती, किरण,कल्पना जैन, सुनीता, राजेश कुमार जैन, श्वेता जैन, सुनील कुमार जैन, बबीता जैन,आरोही जैन, वर्षा जैन, नीता जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।