(स्योहारा/बिजनौर): यह महज स्याही से लिखा गया कोई समाचार नहीं है, यह उस मरते हुए भरोसे का मर्सिया है जो हर रोज किसी तंग गली की चमकती तख्ती के नीचे दम तोड़ देता है। बिजनौर की पगडंडियों और गलियों में आज जिंदगी बचाने के अस्पताल नहीं, बल्कि ‘सफेद कफ़न के घर’ सजे हैं। जहाँ दवा से पहले इंसानियत का सौदा होता है और हाथ में वैध डिग्री आने से पहले मासूमों की मौत का खेल मुकम्मल हो जाता है। जब प्रशासनिक गलियारों से कागजी फरमान निकलते हैं, तो फाइलों पर सख्ती की स्याही बहुत गहरी दिखती है। पर जमीनी हकीकत? हकीकत उन बेगुनाहों की चीखों में दफन है जो इन झोलाछापों के ‘प्रायोगिक’ हाथों की भेंट चढ़ जाते हैं। यहाँ इन दुकानों के भीतर मरीज नहीं, बल्कि मजबूरियाँ कदम रखती हैं; और सफेद कोट पहने मौत के सौदागर बंद कमरों में जिंदगी का आखिरी फैसला कर देते हैं।
शहर का कोई कोना हो या गाँव का कोई शांत सुदूर इलाका, इन तथाकथित क्लीनिकों का जाल किसी जानलेवा कैंसर की तरह फैल चुका है। न कोई वैध डिग्री, न कोई पंजीकरण और न ही कानून का कोई खौफ। जैसे ही मौसम बदलता है और महामारियाँ दस्तक देती हैं, इन कत्लगाहों की रौनक और बढ़ जाती है। बुखार से तपते किसी मासूम शरीर पर जब बिना सोचे-समझे सुई चुभाई जाती है, तो वह तीखा इंजेक्शन सिर्फ चमड़ी को नहीं बेधता, बल्कि पूरे हँसते-खेलते परिवार की उम्मीदों को छलनी कर देता है। आखिर इन नीम-हकीमों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? जवाब साफ है—जिन्हें इस सिस्टम की पहरेदारी करनी थी, उन्होंने अपनी आँखों पर सियासी और प्रशासनिक पट्टी बाँध ली है। स्वास्थ्य विभाग का चाबुक सिर्फ कागजी कब्रिस्तानों में दफन होकर रह गया है। जमीन पर न कोई खौफ है, न कोई ताला। है तो बस एक ‘मौन सहमति’, जो हर रोज चंद रुपयों के एवज में मासूमों की सांसें छीन रही है। अभी कल की ही तो बात है, स्योहारा के उस बदनसीब घर की कल्पना कीजिए जहाँ एक नन्हीं किलकारी गूँजनी थी। उस नवजात बच्ची ने अभी अपनी आँखें खोलकर ठीक से माँ की लोरी भी नहीं सुनी थी कि एक झोलाछाप की घोर लापरवाही ने उससे उसकी माँ को हमेशा के लिए छीन लिया। आज उस दहलीज पर सिर्फ सन्नाटा पसरा है। बच्ची माँ की नन्हीं गोद को तरस रही है और पति की पथराई आँखें इस बहरे सिस्टम की तरफ देखकर चीख-चीख कर पूछ रही हैं— “साहब, मेरे उजड़े हुए सुहाग और इस अनाथ बच्ची का गुनहगार कौन? मेरी गरीबी और मजबूरी, या आपका यह सुस्त प्रशासन?” यह सिर्फ एक देह का शांत होना नहीं, मानवीय संवेदनाओं का सरेआम कत्ल है। यह उस व्यवस्था के मुँह पर करारा तमाचा है जो इन अवैध अड्डों को फलने-फूलने का खाद-पानी दे रही है। याद रखिए, जब तक इन कत्लगाहों पर कानून के परवाने वाले ताले नहीं लटकेंगे, तब तक स्योहारा की आबोहवा में कोई भी जिंदगी महफूज नहीं है। प्रसूता की मौत से दहला स्योहारा: निजी नर्सिंग होम पर लगा लापरवाही का संगीन आरोप स्योहारा।read more:https://pahaltoday.com/instructions-to-strengthen-communication-system-in-network-less-areas-before-elections/
क्षेत्र के एक निजी नर्सिंग होम में प्रसव के बाद एक महिला की मौत हो जाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर का घेराव कर जमकर हंगामा काटा और चिकित्सक पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। मौके पर पहुँची पुलिस ने बमुश्किल स्थिति को संभाला और मामले की तफ्तीश शुरू की। प्राप्त विवरण के अनुसार, ग्राम अलादीनपुर निवासी अरविंद की 23 वर्षीय पत्नी मोनिका को बीते 14 मई को प्रसव पीड़ा होने के चलते मुरादाबाद रोड स्थित स्योहारा के एक निजी नर्सिंग होम में दाखिल कराया गया था। उसी दिन महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि शुरुआत में चिकित्सक महिला की हालत बिल्कुल सामान्य बताते रहे। लेकिन 16 मई को अचानक उसे तेज दर्द और शरीर में सूजन की शिकायत होने लगी। मृतका के देवर अंकित ने बताया कि महिला की तबीयत पल-पल बिगड़ती जा रही थी, लेकिन बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उसे समय पर उचित और विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल सका। जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई, तो 17 मई की रात करीब एक बजे आनन-फानन में महिला को मुरादाबाद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे सीधे आईसीयू में रखा गया। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी; उपचार के दौरान 18 मई की सुबह मोनिका ने दम तोड़ दिया। परिजनों का फूटा गुस्सा, समझौते की सुगबुगाहट जैसे ही मोनिका का शव वापस स्योहारा लाया गया, परिवार में कोहराम मच गया। अपनों को खोने के गम में डूबे परिजनों ने नर्सिंग होम के बाहर इंसाफ की मांग को लेकर भारी हंगामा किया। भिनभिनाती भीड़ को देख पुलिस बल भी मौके पर मुस्तैद हो गया। इसी बीच अंदरूनी सूत्रों से खबर आ रही है कि कानूनी फंदे से बचने के लिए आरोपी चिकित्सक ने मृतका के करीबियों से सांठगांठ कर पर्दे के पीछे ‘समझौते’ का खेल खेल लिया है, जिसकी क्षेत्र में तीखी चर्चा है। अधिकारी का वक्तव्य: “मामला बेहद गंभीर है और इसकी पूरी जानकारी पुलिस के संज्ञान में है। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित तहरीर नहीं दी गई है। जैसे ही पीड़ित पक्ष की ओर से शिकायत प्राप्त होती है, तत्काल मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष व कड़ी वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”