म्योरपुर, सोनभद्र। स्थानीय ब्लाक क्षेत्र के डोंगिया नाला, बेलवादह, अनपरा, बीना, शक्तिनगर, खड़िया एवं बलिया नाला सहित विभिन्न प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों का रविवार को सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी से जुड़े एनजीटी में याचिकाकर्ताओं ने स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने क्षेत्र में फैले प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।read more:https://pahaltoday.com/bhajans-echoed-in-rani-sati-dadi-temple-on-bat-savitri-amavasya/
वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद, वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता जगत नारायण विश्वकर्मा, क्षेत्रीय संयोजक एवं ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल समेत बेचन, कुसुम, सुनीता, विश्वनाथ, रमेश और अशोक ने बताया कि डोंगिया नाला में केमिकल व दुर्गंध युक्त पानी सीधे रिहंद जलाशय में छोड़ा जा रहा है। वहीं बेलवादह में हजारों लीटर प्रति मिनट राखड़ मिश्रित पानी बहाया जा रहा है। टीम ने बताया कि बलिया नाला की स्थिति और भी गंभीर है, जहां का पानी हाथ से छूने लायक भी नहीं बचा है। क्षेत्र की सड़कों पर उड़ती धूल और प्रदूषण के कारण चिल्काडाड़ ग्राम पंचायत की आबादी विभिन्न बीमारियों से जूझ रही है। संयोजक रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में जिला प्रशासन द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को लेकर एनजीटी में 51 पृष्ठों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनपरा क्षेत्र में जानबूझकर रिहंद जलाशय में राखड़ और कोयला धुलाई का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन से संयुक्त निरीक्षण कर तत्काल प्रभाव से रिहंद जलाशय में छोड़े जा रहे राखड़ व कोयला धुलाई के पानी पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही कहा कि ऊर्जांचल क्षेत्र में गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका खुलासा भोपाल एम्स की रिपोर्ट में भी हो चुका है, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।