डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा
विक्रम टेंट के कोने में अपने लैपटॉप की रोशनी में किसी मुजरिम की तरह दुबका बैठा था। अनन्या ने हाथ में मशाल जैसी टॉर्च लेकर प्रवेश किया, जैसे वह किसी गुफा की खोज करने निकली हो।”विक्रम, हम यहाँ ऋषिकेश के पहाड़ों में ‘सोल-सर्चिंग’ करने आए थे या तुम्हारे ऑफिस का पेंडिंग काम निपटाने?” अनन्या ने टॉर्च की रोशनी सीधे उसके चेहरे पर मारते हुए पूछा।विक्रम ने आँखें मिचमिचाते हुए कहा, “अनन्या, सोल-सर्चिंग के लिए भी वाई-फाई की जरूरत होती है। और वैसे भी, हमारा यह ‘लिव-इन’ का ट्रायल पीरियड है। मैं बस इस रिश्ते का ‘रिस्क असेसमेंट’ कर रहा हूँ।””रिस्क असेसमेंट?” अनन्या खिलखिलाकर हंसी। “मगरमच्छों से भरी गंगा के किनारे टेंट लगाकर बैठे हैं, और तुम्हें रिस्क मेरे करीब आने में लग रहा है?””देखो,” विक्रम ने गंभीर होकर चश्मा ठीक किया, “शादी एक फुल-टाइम कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें एग्जिट क्लॉज बहुत महंगा पड़ता है। हमने लिव-इन इसलिए चुना था ताकि हम ‘फ्री’ रह सकें। पर मुझे लग रहा है कि इस आजादी में ‘सर्विस चार्ज’ बहुत ज्यादा है। कल तुमने मेरी पसंदीदा फाइल पर गीली तौलिया रख दी—यह सीधा-सीधा डोमेस्टिक एग्रीमेंट का उल्लंघन है।”अनन्या उसके करीब आई, उसकी सांसों में पहाड़ की ठंडी हवा और एडवेंचर का नशा था। उसने विक्रम का लैपटॉप धीरे से बंद कर दिया। “विक्रम, तुम्हारी समस्या यह है कि तुम मोहब्बत को भी ‘एक्सेल शीट’ पर जीना चाहते हो। प्यार कोई केस नहीं है जिसे तुम जीत सको, यह तो वो ढलान है जहाँ से फिसलने में ही मजा है।”उसने विक्रम का हाथ पकड़ा। विक्रम को ऐसा लगा जैसे उसे 440 वोल्ट का करंट लगा हो, जो किसी कानूनी धारा से बड़ा था।”पर अनन्या, अगर हम सफल नहीं हुए तो? अगर तीन महीने बाद हमें लगा कि हमारे ‘वाइब्स’ मैच नहीं कर रहे?” विक्रम की आवाज़ में घबराहट और रोमांच का मिला-जुला सुर था।”तो हम एक-दूसरे को ‘अनसब्सक्राइब’ कर देंगे,” अनन्या ने उसके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा। “लेकिन तब तक, क्या तुम इस ठंडी रात में एक एडवेंचर फोटोग्राफर के साथ ‘आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट’ करना चाहोगे?”विक्रम का तर्क अब नदी की लहरों में बह चुका था। उसने अनन्या की आँखों में देखा—वहाँ कोई नियम नहीं थे, कोई शर्तें नहीं थीं।”वैसे,” विक्रम ने उसे अपनी ओर खींचते हुए मुस्कुराकर कहा, “इस सेटलमेंट के लिए मैं पेनल्टी भरने को भी तैयार हूँ।”बाहर गंगा अपनी पूरी रफ़्तार में बह रही थी और टेंट के भीतर का तापमान अचानक बढ़ गया था। उनका ‘लिव-इन’ अब एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि एक अधूरी कविता जैसा लग रहा था। अचानक टेंट के बाहर किसी जंगली जानवर के पैरों की आहट सुनाई दी।”वह क्या है?” विक्रम उछलकर अनन्या से चिपक गया।”शायद कोई तेंदुआ है,” अनन्या ने सहजता से कहा।read more:https://pahaltoday.com/celebrated-birthday-with-children-distributed-stationery-and-fruits/“तेंदुआ? अनन्या, हमारे पास कोई लाइफ इंश्योरेंस नहीं है जो इस रिश्ते को कवर करे!””चुप करो वकील बाबू,” अनन्या ने उसे चूमते हुए कहा, “मौत से पहले थोड़ा जी लो। अगर तेंदुआ अंदर आ भी गया, तो कम से कम हम इतिहास के सबसे ‘रोमांटिक और अनमैरिड’ शिकार तो कहलाएंगे।”उस रात, कागजी़ आज़ादी और जंगली डर के बीच, उन्होंने पहली बार जाना कि असली ‘लिव-इन’ वह नहीं जहाँ साथ रहा जाए, बल्कि वह है जहाँ साथ मरते-मरते बचा जाए। जो शख्स पूरी दुनिया को कोर्ट में नचाता था, वह आज एक निडर लड़की और एक कल्पित तेंदुए के डर से अपने ही बनाए ‘प्रोग्रेसिव’ नियमों की बलि चढ़ा चुका था।