बिहार में स्वास्थ्य मंत्रालय नेता पुत्रों को सौंपना एक संयोग है या फिर प्रयोग?

पटना। बिहार की राजनीति में स्वास्थ्य मंत्रालय हमेशा से सबसे ज्यादा चर्चा और विवादों में रहने वाला विभाग रहा है।गुरुवार को सम्राट कैबिनेट का विस्तार हुआ था, जिसमें 32 नए मंत्रियों ने शपथ ली। पूर्व सीएम और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी मंत्री बनाया गया है। सम्राट सरकार में उन्हें बिहार के स्वास्थ्य मंत्रालय दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक निशांत कुमार ने शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी को औपचारिक रूप से संभाल लिया है। निशांत के स्वास्थ्य मंत्री बनने के साथ बहस शुरू हो गई है। क्या बिहार का स्वास्थ्य विभाग अब रसूखदार नेता पुत्रों के लिए सत्ता के प्रशिक्षण का केंद्र या सुरक्षित ठिकाना बन गया है? बिहार के पूर्व सीएम और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजप्रताप यादव से शुरू हुआ यह सिलसिला अब पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के इर्द-गिर्द सिमट गया है। नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे मंगल पांडेय को सम्राट कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। अब उनकी जगह पर निशांत स्वास्थ्य मंत्री बने हैं? साल में 2015 में जब बिहार में महागठबंधन की पहली सरकार बनी, तो उस समय लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव की सियासी लांचिंग हुई थी। तेज प्रताप और तेजस्वी दोनों जीतकर विधायक बने थे। नीतीश की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार में तेजस्वी को डिप्टी सीएम बने तो तेज प्रताप यादव मंत्री बने। तेजप्रताप को स्वास्थ्य मंत्रालय की कमान सौंपी गई। पहली बार के विधायक और बिना किसी प्रशासनिक अनुभव के इतने अहम विभाग का मंत्री बनने पर विपक्ष ने तीखे हमले किए थे। तेजप्रताप जब बिहार के स्वास्थ्य मंत्री थे, तब उनके कार्यकाल में सबसे बड़े विवादों में से एक लालू यादव के घर पर डॉक्टरों की तैनाती का मामला था। मामला तूल पकड़ा तो डाक्टरों की टीम को उनके आवास से हटा दिया गया था।read more:https://worldtrustednews.in/public-representatives-started-the-self-enumeration-campaign-from-the-collectorate/बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब तक राजनीति से पूरी तरह दूर रहे हैं, लेकिन हाल ही में जेडीयू की सदस्यता लिए हैं। अभी तक किसी भी सदन से सदस्य भी नहीं है, वो न ही विधायक हैं और न ही एमएलसी हैं। बिना किसी सदन के सदस्य बने निशांत कुमार गुरुवार को सीधे मंत्री पद की शपथ ली और उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा सौंप दिया। रिपोर्ट के मुताबिक निशांत के राजनीति में कदम रखते हुए स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया, जो सीधे जनता से जुड़ा हुआ विभाग है। बिहार के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि स्वास्थ्य मंत्रालय एक ऐसा विभाग है, जहां काम करने की अपार संभावनाएं हैं। जनता के बीच छवि बनाने का सबसे आसान रास्ता भी। इसके लिए मंगल पांडेय की इस बार कैबिनेट से छुट्टी हो गई है, जो नीतीश कुमार की सरकार में बीजेपी कोटे से स्वास्थ्य मंत्री थे। अब सवाल उठता है कि बिहार की सियासत में लालू यादव के बेटे तेजप्रताप और अब नीतीश के बेटे निशांत को आखिर स्वास्थ्य मंत्रालय ही क्यों सौंपा गया। इसके पीछे कुछ रणनीतिक कारण हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग का बजट राज्य के सबसे बड़े बजटों में से एक है। इसमें ब्लॉक स्तर तक अस्पतालों का जाल फैला है, जिससे नेता को सीधे जमीनी स्तर पर जुड़ने का मौका मिलता है। बिहार जैसे राज्य में जहां स्वास्थ्य व्यवस्थाएं हमेशा चुनौतीपूर्ण रही हैं, वहां अनुभवी विशेषज्ञों के बजाय नेता पुत्रों को प्राथमिकता देना नीतिगत सवाल खड़े करता है। बिहार के सरकारी अस्पतालों की हालत किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा किसी एक्सपेरिमेंट की लैब बनाने के बजाय ऐसे व्यक्ति को सौंपना चाहिए, जिसके पास विजन हो, लेकिन प्रदेश की सियासत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *