पश्चिम बंगाल: एग्जिट पोल के बाद भारी हंगामा

 कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल सामने आने के बाद से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक सरगर्मी और तनाव का माहौल बना हुआ है। गुरुवार रात दक्षिण कोलकाता की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट पर उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक वाहन को घेर लिया। भाजपा समर्थकों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उस वाहन में कुछ संदिग्ध वस्तु लेकर आई थीं। सोशल मीडिया पर आए वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि वाहन के इर्द-गिर्द लोगों की भारी भीड़ जमा है और जमकर नारेबाजी की जा रही है। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का दावा था कि वाहन को बिना जांच के जाने नहीं दिया जा सकता क्योंकि उसमें कुछ संदिग्ध सामान होने की आशंका है। हालांकि, इस मामले में अब तक पुलिस या चुनाव आयोग के पास कोई औपचारिक शिकायत दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है। यह घटना उस समय हुई जब टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी गुरुवार को भवानीपुर के एक ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम का जायजा लेने पहुंची थीं।read more:https://pahaltoday.com/banned-machines-are-exposing-claims-of-administrative-strictness/दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित मतगणना केंद्र पर करीब चार घंटे बिताने के बाद बनर्जी रात करीब 12:07 बजे वहां से निकलीं। उन्होंने वहां से निकलते समय मतगणना प्रक्रिया में धांधली की आशंका जताते हुए चेतावनी दी कि ईवीएम के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी दौरान उत्तर कोलकाता में भी तनाव देखा गया, जहां टीएमसी उम्मीदवारों ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना दिया और ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल उठाए। गौरतलब है कि इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। भवानीपुर सीट पर भी इस बार करीब 87 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक है। भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से है। अधिकारी ने 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट पर बनर्जी को पराजित किया था, जिससे इस बार की यह टक्कर और भी दिलचस्प हो गई है। भवानीपुर को बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, जिसे मिनी इंडिया भी कहा जाता है। टीएमसी के लिए इस सीट को बचाना प्रतिष्ठा का सवाल है, जबकि भाजपा के लिए यहां जीत हासिल करना राज्य की सबसे शक्तिशाली नेता के प्रभाव को चुनौती देने जैसा है।

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